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रोचकयज्ञ एक चिकित्सा और विज्ञान 

लाइव हिन्दुस्तान टीम
Sat, 15 Oct 2016 01:50 AM
यज्ञ एक चिकित्सा और विज्ञान 

हवन-यज्ञ की मत्ता देखते हुए राष्ट्रीय वनस्पति अनुसन्धान संस्थान लखनऊ के वैज्ञानिकों ने इस पर एक रिसर्च की कि क्या वाकई हवन से वातावरण शुद्द होता है और जीवाणु नष्ट होते हैं। उन्होंने ग्रंथों में वर्णित हवन सामग्री जुटाई और जलने पर पाया की ये विषाणु नाश करती है। फिर उन्होंने विभिन्न प्रकार के धुएं पर भी काम किया और देखा की सिर्फ आम की एक किलो आम की लकड़ी जलने से ही हवा में मौजूद विषाणु कम नहीं लेकिन जैसे ही उसके ऊपर आधा किलो हवन सामग्री डाल कर जलायी गयी  तो एक घंटे के भीतर ही कक्ष में मौजूद विषाणुओं का स्तर 14 प्रतिशत तक कम हो गया।

यही नही, उन्होंने आगे भी कक्ष की हवा में मौजुद जीवाणुओ का परीक्षण किया और पाया की कक्ष के दरवाज़े खोले जाने और सारा धुआ निकल जाने के 24 घंटे बाद भी जीवाणुओं का स्तर सामान्य से 16 प्रतिशत कम था। बार बार परीक्षण करने पर ज्ञात हुआ की इस एक बार के धुएं का असर एक माह तक रहा और उस कक्ष की वायु में विषाणु स्तर 30 दिन बाद भी सामान्य से बहुत कम था।

विदेशियों ने भी माना यज्ञ का महत्व
वेबसाइट रिपोर्ट के अनुसार फ्रांस  ट्रेले नामक वैज्ञानिक ने हवन पर रिसर्च की। इसमें उन्हें पता चला की हवन मुख्यतः आम की लकड़ी से ही किया जाता है। जब आम की लकड़ी जलती है तो फ़ॉर्मिक एल्डिहाइड नमक गैस उत्पन्न होती है, जो खतरनाक विषाणु और जीवाणुओं को मरती है तथा वातावरण को शुद्ध करती है। इस रिसर्च के बाद ही वैज्ञानिकों को इस गैस और इसे बनाने का तरीका पता चला। इतना ही नहीं गुड़ को जलने पर भी ये गैस उत्पन्न होती है।

टौटीक नामक वैज्ञानिक ने हवन पर की गयी अपनी रिसर्च में पाया कि यदि आधे घंटे हवन में बैठा जाए या हवन के धुएं से शरीर का संपर्क हो तो टाइफाइड जैसे खतरनाक रोग फैलाने वाले जीवाणु भी मर जाते हैं और शरीर शुद्ध हो जाता है।
यह रिपोर्ट एथ्नोफार्माकोलोजी के शोध पत्र (resarch journal of Ethnopharmacology 2007) में भी दिसंबर 2007 में छप चुकी है। रिपोर्ट में लिखा गया की हवन के द्वारा न सिर्फ मनुष्य बल्कि वनस्पतियों फसलों को नुकसान पहुचाने वाले बैक्टीरिया का नाश होता है। इससे फसलों में रासायनिक खाद का प्रयोग कम हो सकता है।

सामान्य हवन सामग्री
तिल, जौं, सफेद चन्दन का चूरा , अगर , तगर , गुग्गुल, जायफल, दालचीनी, तालीसपत्र , पानड़ी , लौंग , बड़ी इलायची , गोला, छुहारे नागर मौथा , इन्द्र जौ , कपूर कचरी , आँवला ,गिलोय, जायफल, ब्राह्मी आदि।
 

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