Heramba sankashti chaturthi vrat katha: यहां पढ़ें राजा नल से जुड़ी हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा

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Heramba sankashti chaturthi vrat story: हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि भगवान श्रीगणेश को समर्पित है। आज 31 अगस्त को हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत है। आइए यहां पढ़ें हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा।

Heramba sankashti chaturthi vrat katha
हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा

Heramba sankashti chaturthi vrat katha in hindi: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत किया जाता है। इस साल हेरंब संकष्टी चतुर्थी 31 अगस्त 2026, सोमवार को है। इसे बहुला चतुर्थी के नाम से भी जानते हैं। हेरंब का अर्थ 'बड़ा सिर' है, आमतौर पर यह भगवान गणेश के पांच सिर वाले और दस भुजाओं वाले रूप को दर्शाता है। हेरंब रूप में गजानन को 'पंचमुख गणपति' कहा जाता है। मान्यता है कि हेरंब संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत कथा पढ़ने या सुनने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस दिन गणेश जी की पूजा करने से संकटों से मुक्ति और भय का नाश होता है। यहां पढ़ें हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा।

हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में राजा नल और उनकी रूपवती रानी दमयंती का जीवन बहुत सुखद था। लेकिन किसी श्राप के कारण राजा नल का सारा राज-पाट, महल और धन-संपदा नष्ट हो गई और उन्हें राज्य से विमुख होना पड़ा। विषम परिस्थितियों की वजह से राजा नल और रानी दमयंती को एक-दूसरे से अलग होना पड़ा और वे दोनों बिछड़कर अलग-अलग जगहों पर दुख भोगने लगे।

राजा नल के हाथी और घोड़ों का अपहरण हो गया था। डाकुओं ने पूरा राजकोष लूट लिया। शेष भंडार अग्नि में जलकर राख हो गया था। राज्य के विश्वासघाती मंत्रियों ने राजा का साथ छोड़ दिया था। विपरीत परिस्थितियों से घिरे राजा नल वन की ओर चले गए।

जीवनयापन करने के लिए राजा को किसी नगर में घोड़ों की देखभाल करने का काम करना पड़ा और रानी किसी नजर में निवास करने लगीं और राजकुमार कहीं सेवा आदि कार्य करने लगा। परिस्थितियां इतनी विपरीत थीं कि तीनों को भिक्षा आदि मांगकर पेट भरना पड़ रहा था।

एक दिन वन में भटकते हुए रानी दमयंती की मुलाकात महर्षि शरभंग से हुई। रानी ने हाथ जोड़कर मुनि को प्रणाम किया और अत्यंत दुखी होकर पूछा, "हे प्रभु! मैं अपने पति से पुनः किस प्रकार मिल सकती हूँ और हमारे यह कष्ट कैसे दूर होंगे?"

महर्षि शरभंग ने रानी को सांत्वना देते हुए कहा, "हे दमयंती! तुम भाद्रपद (भादों) माह के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी तिथि को संकटहर्ता हेरंब गजानन का व्रत और पूजन करो। श्री गणेश की अनुकंपा से तुम्हारे सभी संकट दूर होंगे और तुम्हें तुम्हारे पति पुनः प्राप्त होंगे।"

महर्षि की आज्ञा मानकर रानी दमयंती ने पूरे श्रद्धा भाव, नियम और संयम के साथ भाद्रपद की गणेश चतुर्थी का व्रत प्रारंभ किया। इस व्रत के प्रभाव से गणेश जी प्रसन्न हुए और केवल सात महीनों के भीतर ही रानी दमयंती का अपने पति राजा नल और पुत्र से पुनः मिलन हो गया। राजा नल का खोया हुआ राज्य और वैभव भी उन्हें वापस मिल गया।

हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व:

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति हेरंब संकष्टी चतुर्थी के दिन श्रद्धा भाव से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करता है और व्रत कथा सुनता या पढ़ता है, उसके जीवन से मुश्किल से मुश्किल संकट दूर हो जाते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Saumya Tiwari

लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण

सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।


विस्तृत बायो


परिचय और अनुभव

सौम्या तिवारी की ग्रह राशि परिवर्तन, व्रत-त्योहार, सामुद्रिक शास्त्र, अंकज्योतिष, वास्तु शास्त्र एवं फेंगशुई, कथा-कहानी जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है। उन्हें ज्योतिष एवं धार्मिक विषयों में करीब 6 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं और धर्म व ज्योतिष (एस्ट्रोलॉजी) सेक्शन का हिस्सा हैं।


इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।


इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।


व्यक्तिगत रुचियां

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।


विशेषज्ञता

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