हरतालिका तीज की तिथि को लेकर कंफ्यूजन, ज्योतिष ने बता दी व्रत की उत्तम तिथि?

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हरतालिका तीज की तिथि को लेकर हो रही है कंफ्यूजन है तो ज्योतिष से भी जान लें, कब से व्रत रखें। किस दिन करें पूजा ।यहां पढ़ें सब कुछ

Hartalika teej Vrat Kab hai
हरतालिका तीज व्रत कब है

भाद्रपद के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि पर रखे जाने वाले हरितालिका व्रत को लेकर अधिकतर लोग कंफ्यूज हो रहे हैं। आपको बता दें कि तीज व्रत को लेकर कंफ्यूज नहीं होना है, इस बार हरतालिका तीज और चतुर्थी व्रत एक दिन पड़ रहे हैं। लेकिन उदया तिथि को शास्त्रों में मान्यता दी गई है, इसलिए हमें हरतालिका तीज व्रत की तिथि को लेकर किसी तरह का कंफ्यूजन नहीं रखना है। इस दिन महिलाएं अपनी पति की लंबी में उम्र के लिए निर्जला व्रत करती हैं और कथा-पूजा करती है। कुछ लोगों में कंफ्यूजन इसलिए है कि तीज में ही कथा और पूजा करनी चाहिए, जो 14 को नहीं 13 को मिल रही है। लेकिन उदया तिथि 14 को मिल रही है। ऐसे में आपको व्रत की तिथि से यह कंफ्यूजन दूर होगी।

कब से कब तक हरतालिका तीज की तिथि

तृतीया तिथि के आरंभ और समापन के समय लोगों में कंफ्यूजन की स्थिति है। इस साल तृतीया की शुरुआत 13 सितंबर को सूर्योदय के बाद सुबह 7:21 बजे होगी। जबकि समापन 14 सितंबर को सुबह 7:19 बजे होगा। उदयकाल में तृतीया 14 सितंबर को मिलेगी, लेकिन शाम में तृतीया 13 को मिल रही है, जिसमें प्रदोष काल में शिवजी की पूजा होती है। भृगु संहिता विशेषज्ञ पं.वेदमूर्ति शास्त्री बताते हैं कि शास्त्रीय परंपरा में व्रत और उद्यापन में उदयातिथि का मान होता है। यूपी-बिहार में अपनी-अपनी परंपरा को मान दिया जाता है तो लोग तीज को वैल्यू दे सकते हैं।

जहां हरितालिका व्रत और पूजन के लिए तृतीया तिथि का प्रत्यक्ष होना जरूरी है, वहां लोग 13 सितंबर को व्रत कर सकते। हालांकि 14 सितंबर को सुबह 7:19 बजे से पहले भी वे पूजन कर सकते हैं। यह भी क उदयकाल में मिलने वाली तिथि यदि अगले कुछ ही पलों अथवा घंटों बाद बदल जाए तो भी उसका मान पूरे दिन रहता है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार 14 सितंबर को व्रत श्रेयष्कर है और शुभ माना जा रहा है। अगर आप तृतीया तिथि समाप्त होने से पहले सुबह ही पूजन कर लेते हैं तो व्रत का पारण चतुर्थी तिथि लगने के बाद उसी दिन सूर्यास्त के बाद कर सकते हैं।

इस दिन मनाते हैं शिवजी और पार्वती की मिट्टी की मूर्ति

मिट्टी या रजत-सुवर्णादि धातु से निर्मित शिव-पार्वती की मूर्ति का पंचोपचार, दशोपचार अथवा षोडशोपचार पूजन करें। सुख-समृद्धि के दाता श्रीगणेश और गौरी की भी पूजा करें। नैवेद्य में विभिन्न प्रकार के सूखे मेवे, ऋतुफल, मिष्ठान्न अर्पित करें। हरितालिका तीज कथा का श्रवण करें। व्रत की रात्रि में जागरण करके देवी-देवताओं की महिमा में मंगल गान का विधान है। ज्योतिषाचार्य पं.विकास शास्त्री के अनुसार सर्वार्थसिद्धि, शोभन, गजकेसरी और पंचमहापुरुष योग बनने से तीज व्रत का महात्म्य बढ़ गया है। इन चारों ही योगों के फल अत्यंत शुभ और लाभप्रद हैं। गजकेसरी योग का महत्व विशेष रूप से माना गया है।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

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शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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