हरतालिका तीज व्रत से पहले पूजा की ये चीजें ले आएं, पूरी लिस्ट देखें
Hartalika teej vrat : हरतालिका तीज की पूजा के लिए आपको क्या-क्या चाहिए होगा, यहां आप सभी लिस्ट पढ़ सकते हैं। एक दिन पहले ही मंगा लें पूजा की सामग्री

माता पार्वती ने शिवजी को पाने के लिए हरतालिका तीज व्रत किया था, तभी भगवान शिव माता को मिले। माता पार्वती के पिता ने उनका विवाह भगवान विष्णु से तय कर दिया था। यह जानकर माता पार्वती सहेलियों के साथ बाहर चली गई और भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। उन्होंने मिट्टी की शिवजी की प्रतिमा बनाकर उनका अभिषेक किया, इससे उन्हें भगवान शिव पति रूप में मिले। तीज के दिन महिलाएं निर्जल रहकर शाम को प्रदोष काल में मिट्टी से निर्मित उमा-महेश्वर व भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करेंगी। इस दिन पंचोपचार, षोडशोपचार या दशोपचार विधि से शिवजी का पूजन-अर्चन किया जाएगा। इसके बाद महिलाएं तीज की कथा सुनेंगी व रात्रि जागरण करेंगी। इस दिन पूजा की सामग्री नोट कर लें। किन चीजों की पूजा में जरूरत होगी।
व्रत में किन चीजों की जरूरत होगी?
दिव्य प्रतिमा अगर आप घर पर बनाना चाहते हैं तोआपको शुद्ध गीली काली मिट्टी या नदियों की पवित्र बालू रेत की जरूरत होगी। इसके लिए मिट्टी एक दिन पहले ही मगवां कर रख लें। भगवान शिव और परिवार का अभिषेक करने के लिए शुद्ध जल, गंगाजल, पंचामृत जिसमें दूध, दही, घी, शहद, शक्कर आदि मिले हों, पूजा के दिन ही बनाएं। इसके अलावा अबीर, चंदन, कुमकुम, अक्षत, इत्र, जनेऊ, कलावा, मौली और इत्र, काले तिल, सरसों, आदि भी एकत्र कर लें। पूजा से पहले कलश स्थापना के लिए आपको तांबे या पीतल का कलश, सूखा नारियल, पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची आदि रख सकते हैं। पूजा के लिए मिट्टी या धातु के दीपक ले आएं, मिट्टी के लाएंगे तो शुद्ध माने जाते हैं। देशी घी, तिल/सरसों का तेल, रुई की बत्तियां, कपूर, धूपबत्ती, माचिस रख लें। मां पार्वती को चढ़ाने के लिए आपको 16 श्रृंगार पिटारी में मेहंदी, सिंदूर, कुमकुम, बिंदी, काजल, चूड़ियां, बिछिया, महावर, कंघी, शीशा एवं अन्य पारंपरिक श्रृंगार वस्तुएं को रखना चाहिए।
कौन से पत्ते चढ़ाएं?
फलों में सेब, केला आदि अर्पित कर सकते हैं, इसके साथ भीगे हुए चने, सत्तू, भांग, धतूरा और घर की बनी मिठाइयां रखनी चाहिए। शिवलिंग पर पत्तियां हमेशा उल्टी और फूल-फल सीधे चढ़ाए जाते हैं। बिल्वपत्र,बांस के पत्ते की टोकरी, देवदार पत्र ऐश्वर्य और कीर्ति के लिए अर्पित करें। धतूरा पत्र के लिए मोक्ष एवं बंधनों से मुक्ति के लिए अर्पित करें। शमी के पत्ते धन-धान्य और अक्षय समृद्धि के लिए अर्पित करें। एक बांस की टोकरी, जिसमें सारा सामान रखा जाए।
हरतालिका तीज का व्रत कब है?
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7:15 बजे शुरू होकर 14 सितंबर को सुबह 7:29 बजे तक रहेगी, ऐसे में उदयकाल व्यापिनी तिथि के शास्त्रोक्त नियम के अनुसार 14 सितंबर को ही तीज व्रत रखा जाएगा। इस दिन सौभाग्यवर्धक, वैधव्य दोष नाशक योग बन रहा है। यह संतान और परिवार की सुख-समृद्धि बढ़ाने वाला है। अगले दिन 15 सितंबर को सुबह सात बजे से पहले व्रत का पारण किया जाएगा।


