Hartalika Teej Vrat: किस दिन तृतीया तिथि का उदय नहीं, हरतालिका तीज व्रत कब रखा जाएगा?
Hartalika Teej 2026 vrat kab hai: हरतालिका तीज पर शिवजी और मां पार्वती की पूजा की जाती है। इस दिन 36 घंटे का निर्जला व्रत किया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन पूजा से भगवान शिव और मां पार्वती प्रसन्न होती हैं।

पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि की कामना को लेकर 14 सितंबर को सुहागिनें हरितालिका तीज व्रत करेंगी। इस दिन भगवान शिव और मा पार्वती की खास पूजा की जाती है। प्रदोष काल में भगवान शिव के लिए व्रती महिलाएंअपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। इस दिन खास तौर पर सुहागिने तैयार होकर एक साथ मिलकर पूजा करती हैं। यह व्रत कई कठिन व्रतों में से एक माना गया है। कहा जाता है कि इस व्रत में भगवान शिव की मिट्टी की प्रतिमा बनाई जाती है। उससे खास तौर पर पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत मां पार्वती ने शिवजी को पाने के लिए किया था, तभी भगवान पति रूप में उन्हें प्राप्त हुए थे। वे भगवान शिव को पति रूप में पाना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने तपस्या की और निर्जला रहकर व्रत किया। उनकी तपस्या और अटूट भक्ति से शिवजी और मां पार्वती का विवाह हुआ। इसी मान्यता के चलते हरतालिका तीज पर महिलाएं माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा कर अपने वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है।
किस दिन है हरतालिका तीज व्रत
भाद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7.23 बजे से शुरू हो रहा है, जो 14 सितंबर की सुबह 7.27 बजे तक रहेगा। उदयातिथि के कारण हरितालिका तीज व्रत का निर्जला उपवास सुहागिनें 14 सितंबर को करेंगी।
उदयातिथि में हरितालिका तीज व्रत मनाने को लेकर मिथिला पंचांग और ऋषिकेश पंचांग के विद्वानों में सहमति है। मिथिला पंचांग के विद्धान आचार्य माधवानंद बताते हैं कि हरितालिका तीज व्रत तृतीया तिथि के उदयकाल में मनाया जाना धर्मग्रंथों के अनुरूप है। 13 सितंबर को तृतीया तिथि का उदय नहीं हो रहा है। इसका उदय 14 सितंबर को हो रहा है। इसलिए इसी दिन तीज व्रत मनाना श्रेयस्कर होगा। ज्योतिषाचार्य आचार्य माधवानंद कहते हैं कि 14 सितंबर को ही मिथिला की महिलाएं चौरचन (चौठ चंद्र) व्रत भी मनाएंगी।


