हरतालिका तीज के व्रत में भूलकर भी ना करें ये 5 काम, नहीं तो अधूरी रह जाएगी पूजा
हरतालिका तीज के निर्जला व्रत में अनजाने में की गई छोटी गलतियां पूजा का फल कम कर सकती हैं। माता पार्वती और शिव जी की कृपा पाने के लिए जानें इस पावन दिन क्या करें और क्या ना करें।

सुहागिन महिलाओं के लिए हरतालिका तीज अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन से जुड़ा महापर्व है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को रखा जाता है। इस बार हरतालिका तीज 14 सितंबर को मनाई जाएगी। वैसे तो इस व्रत के नियम बहुत साधारण हैं, लेकिन इस दिन छोटी चूक से भी पूजा अधूरी रह सकती है। इसलिए व्रत शुरू करने से पहले जान लें कि इस दिन किन गलतियों से बचना जरूरी है।
तीज पर काले रंग से करें परहेज
हरतालिका तीज पर सुहागिन महिलाओं के सोलह शृंगार का विशेष महत्व है। इस दिन लाल, हरे या अन्य शुभ रंगों के कपड़े पहनने की परंपरा है। लेकिन गलती से भी तीज काले रंग के कपड़े या चूड़ियां नहीं पहनन। धार्मिक मान्यता में लाल रंग को सुहाग और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए महिलाएं अपनी पसंद के अनुसार, लाल रंग की साड़ी, चूड़ी या अन्य शृंगार सामग्री का इस्तेमाल कर सकती हैं।
व्रत में क्रोध और विवाद से बचें
हरतालिका तीज के दिन मन को शांत रखना चाहिए। व्रत रखने वाली महिलाओं को परिवार के सदस्यों से बहस या विवाद करने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि पूजा के दौरान मन में शांति और सकारात्मक भाव होना जरूरी है। इसलिए छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव लेने के बजाय दिन को पूजा और भक्ति में बिताना बेहतर माना जाता है। परिवार में प्रेम और सौहार्द का माहौल बनाए रखें।
दिन में सोने से बचें
हरतालिका तीज के व्रत को कठिन व्रतों में गिना जाता है। इस दिन निर्जला व्रत रखने के साथ रात में जागरण करना फलदायी माना जाता है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को विशेष तौर पर दिन में सोने से बचना चाहिए। खाली समय में भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण, भजन या मंत्र जाप कर सकती हैं। हालांकि, निर्जला व्रत स्वास्थ्य के लिहाज से कठिन हो सकता है, इसलिए गर्भवती, बुजुर्ग या अस्वस्थ महिलाओं को अपनी सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए।
एक बार संकल्प लें तो निभाएं व्रत
हरतालिका तीज को लेकर मान्यता है कि व्रत का संकल्प लेने के बाद इसे हर साल निभाया जाता है। इसी वजह से महिलाएं इसे शुरू करने से पहले अपनी क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान जरूर रखें। हालांकि, किसी बीमारी या विशेष परिस्थिति में व्रत रखना संभव ना हो, तो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है। ऐसी स्थिति में परिवार के बड़े या पुरोहित से सलाह लेकर अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा की जा सकती है।
गणेश पूजा के बाद करें शिव-पार्वती की आराधना
हरतालिका तीज की पूजा में सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें। हिंदू धर्म में गणेश जी को प्रथम पूज्य माना जाता है। इसलिए गणेश पूजा के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इसके बाद व्रत कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ शिव-पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख और सौभाग्य की कामना पूरी होती है।
सुहाग की रक्षा और दांपत्य जीवन में मधुरता लाने के लिए हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन नियमों का सही पालन करते हुए सच्चे मन से की गई पूजा विशेष लाभ देती है।


