
हनुमान जी का ये उपाय बदल देगा आपकी किस्मत, बनने लगेंगे बिगड़े काम
Hanuman Ji Upay : हनुमान जी इस कलयुग के सबसे जागृत और कृपालु देवता माने जाते हैं। जो भी सच्चे मन से उनकी भक्ति करता है, हनुमान जी उसकी हर परेशानी दूर कर देते हैं। कहा जाता है कि हनुमान जी की कृपा से सोया हुआ भाग्य भी जाग उठता है।
Hanuman Ji Upay : हनुमान जी इस कलयुग के सबसे जागृत और कृपालु देवता माने जाते हैं। जो भी सच्चे मन से उनकी भक्ति करता है, हनुमान जी उसकी हर परेशानी दूर कर देते हैं। कहा जाता है कि हनुमान जी की कृपा से सोया हुआ भाग्य भी जाग उठता है। जीवन में जब सब रास्ते बंद लगते हैं, तब केवल हनुमान जी का नाम लेने से नई उम्मीद और शक्ति मिलती है। हनुमान जी सिर्फ बल और साहस के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे श्रद्धा, भक्ति और निष्ठा के प्रतीक भी हैं। जिन पर उनकी कृपा होती है, उनके जीवन से डर, नकारात्मकता और असफलता दूर हो जाती है। ऐसे व्यक्ति को हर काम में सफलता मिलने लगती है और जीवन में किसी चीज की कमी नहीं रहती है। हनुमान जी अपने भक्तों के दुख हर लेते हैं और उन्हें आत्मविश्वास, ऊर्जा और शांति का वरदान देते हैं। कलयुग में जो हनुमान जी की भक्ति करता है, वह न केवल संकटों से बचा रहता है बल्कि उसका भाग्य भी चमक उठता है। हनुमान जी सच्चे श्रद्धालुओं के रक्षक और मार्गदर्शक हैं। हनुमान जी का एक उपाय ऐसा है जिसको करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी हो जाती हैं। आइए जानते हैं, हनुमान जी को प्रसन्न करने का आसान उपाय-

हनुमान चालीसा का पाठ- हनुमान चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से जीवन में अद्भुत सकारात्मक बदलाव आते हैं। यह न केवल मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ाता है, बल्कि भय, नकारात्मक ऊर्जा और बुरे प्रभावों से भी रक्षा करता है। कहा जाता है कि हनुमान चालीसा का पाठ करने से मनुष्य के जीवन में बाधाएं दूर होती हैं, कार्यों में सफलता मिलती है और मन स्थिर रहता है। यह व्यक्ति के भीतर साहस, धैर्य और ऊर्जा का संचार करता है।
आगे पढ़ें हनुमान चालीसा-
श्री हनुमान चालीसा- (Shree Hanuman Chalisa)
श्रीगुरु चरन सरोज रज
निजमनु मुकुरु सुधारि
बरनउँ रघुबर बिमल जसु
जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर
राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी
कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुण्डल कुँचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे
काँधे मूँज जनेउ साजे
शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जग वंदन।।
बिद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा
बिकट रूप धरि लंक जरावा
भीम रूप धरि असुर सँहारे
रामचन्द्र के काज संवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये
श्री रघुबीर हरषि उर लाये
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना
लंकेश्वर भए सब जग जाना
जुग सहस्र जोजन पर भानु
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं
दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे
होत न आज्ञा बिनु पैसारे
सब सुख लहै तुम्हारी सरना
तुम रच्छक काहू को डर ना।।
आपन तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हाँक तें काँपै
भूत पिसाच निकट नहिं आवै
महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरन्तर हनुमत बीरा
संकट तें हनुमान छुड़ावै
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा
तिन के काज सकल तुम साजा
और मनोरथ जो कोई लावै
सोई अमित जीवन फल पावै।।
चारों जुग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा
साधु सन्त के तुम रखवारे
असुर निकन्दन राम दुलारे।।
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता
राम रसायन तुम्हरे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुह्मरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै
अन्त काल रघुबर पुर जाई
जहां जन्म हरिभक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई
सङ्कट कटै मिटै सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जय जय जय हनुमान गोसाईं
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं
जो सत बार पाठ कर कोई
छूटहि बन्दि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा
होय सिद्धि साखी गौरीसा
तुलसीदास सदा हरि चेरा
कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।





