हनुमान जी का सिंदूर माथे पर लगाना चाहिए या नहीं? ये है बजरंगबली को सिंदूर चढ़ाने का नियम
हनुमान जी का सिंदूर कई लोग माथे पर लगाते हैं लेकिन ऐसा करना कितना सही है? आइए जानते हैं कि सिंदूर लगाने का तरीका क्या है और साथ ही जानेंगे कि भगवान हनुमान को सिंदूर चढ़ाने के क्या नियम हैं?

हिंदू धर्म में सोमवार से लेकर रविवार का दिन किसी ना किसी देवी-देवता की पूजा के लिए जरूर समर्पित रहता है। आज शनिवार है। शनिवार के दिन विशेष रुप से शनिदेव और हनुमान जी की पूजा होती है। बात की जाए भगवान हनुमान की तो शनिवार के दिन उनके मंदिर में भक्तों की खूब भीड़ लगती है। हर कोई चाहता है कि भगवान उन पर विशेष कृपा करें। मंदिर में लोग हनुमान जी के चरणों का सिंदूर माथे पर लगाकर उनका आशीर्वाद लेते हैं। हालांकि मन में ये सवाल आता है कि क्या हर किसी को ये सिंदूर लगाना चाहिए? इसे लगाना सही भी है या नहीं? या फिर इसे लगाते वक्त कोई सावधानी बरतनी है? इन सवालों को लेकर अक्सर लोग कन्फ्यूज होते हैं। तो आइए जानते हैं इससे जुड़े कुछ फैक्ट्स के बारे में।
माथे पर भगवान हनुमान का सिंदूर लगाएं या नहीं
भगवान हनुमान का सिंदूर माथे पर लगाना कितना सही है? इस पर बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक प्रवचन के दौरान अपनी बात सामने रखी है। उनका कहना है कि बागेश्वर बाबा ने कहा कि हनुमान जी का सिंदूर माथे पर लगाना चाहिए या नहीं? सिंदूर लगाने की जरूरत नहीं है। हनुमान जी को कष्ट मिटाना होगा तो बिना सिंदूर के ही मिटा देंगे।
इस वजह से नहीं लगाना चाहिए माथे पर सिंदूर
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने प्रवचन में आगे कहते हैं कि हनुमान जी अतुलित बल के धाम हैं। हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं। हम लोगों का शरीर अवगुण से भरा हुआ होता है। हनुमान जी के तेज को हम लोग नहीं संभाल सकते हैं। हम कितने भी पवित्र बने रहें अपवित्रता हो ही जाती है। उनका कहना है कि इंसान हमेशा पूरी तरह से शुद्ध नहीं होता है। वहीं उनका तेज इतना ज्यादा है कि इस वजह उनके सिंदूर को माथे पर लगाकर दिन भर ऐसे ही नहीं रहना चाहिए।
सिंदूर लगाने और हटाने का तरीका
उन्होंने आगे कहा कि हनुमान जी के सिंदूर को अगर लगा भी लिया तो बुरे विचार के आने के पहले अपवित्र होने के पहले कुछ क्षण लगाकर गीले कपड़े से उसे पोछ दें। बाद में इस कपड़े को धूलकर उसका पानी किसी वृक्ष की जड़ में डाल दें तो हनुमान जी का सिंदूर लगाया जा सकता है। तो इस तरह से इस बात को समझें कि आप अपने कर्मों को सही रखें और विचारों को शुद्ध रखें। भगवान हनुमान बिना सिंदूर के ही अपना आशीर्वाद हमें दे देंगे। हालांकि जिन्हें उनका सिंदूर लगाना है वो सही तरीके से इस्तेमाल करते इसे माथे पर लगा और हटा सकते हैं।
हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने का तरीका
हिंदू धर्म में हनुमान जी को पूजा के दौरान सिंदूर चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है। इसके लिए मंगलवार और शनिवार का दिन सबसे अच्छा होता है। बस पूजा से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहन लें और फिर सिंदूर में चमेली के तेल को मिलाकर ही इसे चढ़ाएं। इसी के साथ ॐ हनुमते नमः मंत्र का सच्चे मन से पाठ करें। इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करके पूजा पूरी कर लें। इसके बाद भगवान हनुमान को भोग चढ़ा दें
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो:
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न शास्त्र
फेंगशुई
हस्तरेखा शास्त्र


