Hanuman janmotsav 2026: महिलाएं गले में क्यों लगाती हैं हनुमान जी का तिलक? नोट कर लें इसे लगाने का सही तरीका

Dheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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बजरंगबली की पूजा के दौरान लोग तिलक जरूर लगाते हैं। मान्यता है कि हनुमान जी का तिलक लगाने से बल बढ़ता है। आमतौपर पर पुरुष हनुमान जी का तिलक माथे पर लगाते हैं, लेकिन महिलाएं कभी भी उनके चरण से लेकर अपने शरीर के किसी भी हिस्से पर तिलक नहीं लगाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें बाल ब्रह्मचारी कहा जाता है।

Hanuman janmotsav 2026: महिलाएं गले में क्यों लगाती हैं हनुमान जी का तिलक? नोट कर लें इसे लगाने का सही तरीका

हनुमान जयंती का पर्व चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। हालांकि, चैत्र माह में पड़ने वाली हनुमान जयंती का विशेष रूप से दक्षिण भारत में अधिक महत्व होता है। मान्यता है कि इसी दिन अंजनी पुत्र हनुमान जी का जन्म हुआ था। हनुमान जी को भगवान शिव का अंश और उनके रुद्र अवतारों में से एक माना जाता है। उन्हें संकटों को दूर करने वाला देवता भी कहा जाता है। जो भक्त सच्ची श्रद्धा से उनकी और भगवान शिव की पूजा करता है, उसके जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं।

बजरंगबली की पूजा के दौरान लोग तिलक जरूर लगाते हैं। मान्यता है कि हनुमान जी का तिलक लगाने से बल बढ़ता है। आमतौपर पर पुरुष हनुमान जी का तिलक माथे पर लगाते हैं, लेकिन महिलाएं कभी भी उनके चरण से लेकर अपने शरीर के किसी भी हिस्से पर तिलक नहीं लगाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें बाल ब्रह्मचारी कहा जाता है।

गले में तिलक लगाने का महत्व

लेकिन मंदिरों में कटोरी में रखा गया तिलक महिलाएं जरूर लगाती हैं। वो यह तिलक माथे के बजाय गले में लगाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे कंठ शांत रहता है। इससे आपका ध्यान ईश्वर की तरफ केंद्रीत हो जाता है। साथ ही, गले में हनुमान जी का तिलक लगाने से मंगल मजबूत होता है। सारे मंगल दोष से मुक्ति मिलती है। इसलिए अक्सर महिलाएं अपने गले में हनुमान जी का तिलक लगाती हैं।

गले में तिलक लगाने के फायदे

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक गले पर तिलक लगाने से महिलाओं के मंगल दोष शांत होते हैं।
साथ ही उन्हें वैवाहिक सुख प्राप्त होता है।
गले पर हनुमान जी का तिलक लगाने से मंगल बलवान होता है।
गले पर तिलक लगाने से कंठ शांत रहता है और वाणी में मधुरता आती है।
साथ ही गले पर तिलक लगाने से ध्यान केंद्रित होता है और मन शांत रहता है।

तिलक लगाने की सही विधि

सबसे पहले हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें।
इसके बाद उसी पवित्र सिंदूर से अपने गले पर तिलक लगाएं।
तिलक लगाते समय श्रद्धा भाव से हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है।

तिलक लगाने के जरूरी नियम

स्नान और ध्यान करने के बाद ही तिलक लगाना शुभ माना जाता है।
सबसे पहले भगवान को तिलक अर्पित करें, उसके बाद स्वयं लगाएं।
तिलक लगाते समय भगवान के मंत्रों का जाप करना लाभकारी होता है।
तिलक लगाने के बाद कुछ समय तक भगवान का ध्यान अवश्य करें।
तिलक लगाने के तुरंत बाद उसे साफ नहीं करना चाहिए।
माथे पर तिलक अनामिका उंगली या अंगूठे से लगाना उचित माना जाता है।

अगर आप मंगलवार के दिन बजरंग बली के मंदिर जाती हैं और वहां तिलक लगाती हैं, तो इसे माथे की बजाय गले पर लगाना अधिक शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मंगल दोष दूर होते हैं और बजरंग बली की कृपा से जीवन में सुरक्षा और सकारात्मकता बनी रहती है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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