Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती पर सुंदरकांड का पाठ कब करें? नोट कर लें नियम, महत्व और लाभ

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भक्त इस दिन पूरे विधि-विधान से हनुमान जी की उपासना करते हैं और सुंदरकांड का पाठ करते हैं। मान्यता है कि इस दिन सुंदरकांड का पाठ करने से भक्त की सभी मनोकामना पूर्ण होती है। चलिए जानते हैं कि हनुमान जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ कैसे करें और इसका महत्व और फायदे क्या-क्या है?

Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती पर सुंदरकांड  का पाठ कब करें? नोट कर लें नियम, महत्व और लाभ

आज यानी 2 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। इस दिन बजरंगबली की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि पर हनुमान जी का जन्म हुआ था। इसीलिए चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। भक्त इस दिन पूरे विधि-विधान से हनुमान जी की उपासना करते हैं और सुंदरकांड का पाठ करते हैं। मान्यता है कि इस दिन सुंदरकांड का पाठ करने से भक्त की सभी मनोकामना पूर्ण होती है।साथ ही जीवन में धन, ऐश्वर्य, बल और बुद्धि की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कि हनुमान जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ कैसे करें और इसका महत्व और फायदे क्या-क्या है?

सुंदरकांड का महत्व

रामचरितमानस का पांचवां अध्याय सुंदरकांड अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी रचना महान संत गोस्वामी तुलसीदास ने 16वीं शताब्दी में की थी। यह एक ऐसा खंड है जो पूर्ण रूप से हनुमान जी की वीरता, भक्ति और पराक्रम को समर्पित है। सुंदरकांड में सीता माता की खोज, सुरसा का सामना, लंका में प्रवेश, अशोक वाटिका का विध्वंस और लंका दहन जैसी कई महत्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन मिलता है। इन सभी प्रसंगों का गहरा आध्यात्मिक महत्व है और इन्हें अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। यही कारण है कि सुंदरकांड को एक शक्तिशाली आध्यात्मिक ग्रंथ और योग साधना का महत्वपूर्ण आधार भी माना जाता है।

हनुमान जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पढ़ने के नियम

- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुंदरकांड का पाठ सुबह या शाम 4 बजे के बाद करना अधिक शुभ माना जाता है।
- दोपहर 12 बजे के बाद इसका पाठ करना उचित नहीं माना जाता, क्योंकि इससे पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता।
- पाठ शुरू करने से पहले एक साफ चौकी रखें और उस पर लाल रंग का स्वच्छ वस्त्र बिछाएं।
- इसके बाद हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और घी का दीपक जलाएं।
- सुंदरकांड का पाठ आरंभ करने से पहले भगवान श्रीराम और हनुमान जी की विधिपूर्वक पूजा करें।
- ध्यान रखें कि पाठ को बीच में छोड़े बिना पूरा करें और इस दौरान किसी से बातचीत न करें।

पाठ करते समय इन बातों का रखें ध्यान

पाठ करते समय मन को शांत और सकारात्मक रखें। पाठ के दौरान किसी भी नकारात्मक विचार को मन में न आने दें। पूजा के अंत में हनुमान जी को फल, मेहंदी, बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग अर्पित करें। साथ ही अंत में हनुमान जी की आरती अवश्य करें और प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों के साथ बांटकर ग्रहण करें।

हनुमान चालीसा के लाभ

- सुंदर कांड का नियमित पाठ करने से मन को शांति मिलती है और तनाव व चिंता धीरे-धीरे दूर होने लगती है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।

- जो लोग श्रद्धा के साथ सुंदर कांड का पाठ करते हैं, उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे जीवन की कठिनाइयों का सामना अधिक मजबूती से कर पाते हैं।

- ऐसा माना जाता है कि सुंदर कांड के प्रभाव से भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

- साथ ही हनुमान जी की कृपा से शनि, राहु और केतु जैसे ग्रहों के अशुभ प्रभाव भी कम होते हैं।

- सुंदर कांड का पाठ करने से व्यक्ति को कर्ज से राहत मिलने के योग बनते हैं और परिवार में सुख-शांति व खुशहाली बनी रहती है।

- सुंदरकांड का पाठ करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और कई प्रकार के ग्रह दोष से छुटकारा मिल जाता है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

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धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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