हनुमान जन्मोत्सव कब है? नोट कर लें सही डेट, पूजा विधि, और चोला चढ़ाने का तरीका

Mar 29, 2026 10:59 pm ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Hanuman Janmotsav 2026 : हनुमान जी इस कलयुग में जागृत देव हैं। हनुमान जी की कृपा जिस व्यक्ति पर हो जाए उसे जीवन में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं रहती है। हनुमान जी भगवान श्री राम के सबसे बड़े भक्त हैं। हनुमान जी का जन्मोत्सव हर साल चैत्र पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।

हनुमान जन्मोत्सव कब है? नोट कर लें सही डेट, पूजा विधि, और चोला चढ़ाने का तरीका

Hanuman Janmotsav 2026 : हनुमान जी इस कलयुग में जागृत देव हैं। हनुमान जी की कृपा जिस व्यक्ति पर हो जाए उसे जीवन में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं रहती है। हनुमान जी भगवान श्री राम के सबसे बड़े भक्त हैं। हनुमान जी का जन्मोत्सव हर साल चैत्र पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में हनुमान जी का जन्म इसी दिन हुआ था। इस दिन विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस साल हनुमान जी के जन्मोत्सव की तिथि को लेकर कंफ्यूजन है। आइए जानते हैं, हनुमान जन्मोत्सव कब है…

कब है हनुमान जन्मोत्सव 2026

हनुमान जी का जन्मोत्सव हर साल चैत्र पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, लेकिन इस बार तिथि को लेकर लोगों में थोड़ा भ्रम बना हुआ है। कई लोग 1 अप्रैल और कुछ 2 अप्रैल को लेकर कन्फ्यूज हैं। वजह है पूर्णिमा तिथि का दो दिन तक रहना। ऐसे में सही दिन को लेकर सवाल उठ रहे थे। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा 1 अप्रैल की सुबह शुरू होकर 2 अप्रैल की सुबह तक रहेगी। हालांकि, हिंदू परंपरा में त्योहार उदया तिथि के आधार पर मनाए जाते हैं, इसलिए इस साल हनुमान जन्मोत्सव 2 अप्रैल को मनाया जाएगा।

क्या है इस दिन का महत्व- मान्यता है कि इसी दिन अंजनी पुत्र हनुमान का जन्म हुआ था। हनुमान जी को शक्ति, साहस और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। उन्हें भगवान शिव का अंश भी कहा जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से संकट दूर होने और मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है।

पूजा विधि-

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  • घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करें।
  • हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं।
  • उन्हें सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें।
  • लड्डू, गुड़ या चने का भोग लगाएं।
  • इसके बाद हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें।
  • पूजा के दौरान मन शांत रखें और ध्यान भगवान पर रखें।

हनुमान जी को चोला चढ़ाने की विधि- हनुमान जन्मोत्सव के दिन हनुमान जी को चोला चढ़ाना बेहद ही शुभ माना जाता है। चोला चढ़ाने से पहले सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद मंदिर या घर के पूजा स्थान पर दीपक जलाएं। सबसे पहले हनुमान जी का गंगाजल से अभिषेक करें और साफ कपड़े से मूर्ति को हल्के हाथ से पोंछ लें। इसके बाद सिंदूर में घी या चमेली का तेल मिलाकर तैयार करें और धीरे-धीरे हनुमान जी को चोला चढ़ाएं। आमतौर पर शुरुआत पैरों से की जाती है और फिर पूरे शरीर पर लगाया जाता है। चोला चढ़ाने के बाद जनेऊ पहनाया जाता है और फिर सोने या चांदी के वर्क से हनुमान जी का श्रृंगार किया जाता है और अंत में भोग लगाकर आरती की जाती है। हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ भी इस दौरान किया जाता है।

चोला चढ़ाने की सामग्री- हनुमान जी को चोला चढ़ाने के लिए ज्यादा सामान की जरूरत नहीं होती, लेकिन जो चीजें हैं, उन्हें सही तरीके से रखना जरूरी है। इसमें सिंदूर, घी या चमेली का तेल, वस्त्र, जनेऊ और वर्क (चांदी या सोने का) शामिल होता है। इसके अलावा प्रसाद के लिए लड्डू या गुड़-चना रखा जा सकता है। पूजा के समय दीपक और अगरबत्ती भी जलाएं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


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