Hanuman Ashtak Path: भय, शत्रु और कर्ज से छुटकारा समेत ये 5 बड़े फायदे देता है हनुमान अष्टक, जानिए इसके पाठ के नियम

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हनुमान अष्टक पाठ भय, शत्रु, कर्ज और मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाता है। जानें हनुमान अष्टक के 5 प्रमुख फायदे, पाठ के नियम और सही विधि। मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ विशेष फलदायी है।

Hanuman Ashtak Path: भय, शत्रु और कर्ज से छुटकारा समेत ये 5 बड़े फायदे देता है हनुमान अष्टक, जानिए इसके पाठ के नियम

हनुमान अष्टक हनुमान जी की स्तुति का एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। इसमें हनुमान जी की लंका विजय, राम-कार्य सिद्धि और संकटमोचन रूप का वर्णन है। जो भक्त श्रद्धा और नियम से इसका पाठ करता है, उसे भय, शत्रु, कर्ज, मानसिक तनाव और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।

हनुमान अष्टक का महत्व

हनुमान अष्टक में हनुमान जी को संकटमोचन कहा गया है। यह स्तोत्र उन भक्तों के लिए वरदान साबित होता है, जो किसी प्रकार के भय, मानसिक अशांति या कानूनी परेशानी से गुजर रहे हैं। पाठ करने से हनुमान जी के दिव्य बल और बुद्धि की प्राप्ति होती है।

भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति

हनुमान अष्टक का नियमित पाठ करने से भूत-प्रेत बाधा, अज्ञात भय और नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा मिलता है। जो लोग रात में डर के कारण सो नहीं पाते या अकेले रहने से घबराते हैं, उन्हें इस स्तोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए। इससे मन में साहस और सुरक्षा का भाव जागृत होता है।

शत्रु और कानूनी विवादों से राहत

हनुमान अष्टक का पाठ शत्रु बाधा और कोर्ट-कचहरी की समस्याओं में अद्भुत काम करता है। अगर आपको किसी प्रकार का कानूनी मामला, मुकदमा या छिपे हुए दुश्मन से परेशानी है, तो इसका पाठ करने से विजय प्राप्त होती है। हनुमान जी अपने भक्तों की रक्षा स्वयं करते हैं।

कर्ज और आर्थिक संकट से मुक्ति

हनुमान अष्टक कर्ज की समस्या में भी राहत देता है। नियमित पाठ से आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं, नौकरी या व्यापार में उन्नति होती है और धन संबंधी परेशानियां कम होने लगती हैं।

आत्मविश्वास और मानसिक शांति

यह स्तोत्र पढ़ने से आत्मविश्वास बढ़ता है और मानसिक विकार दूर होते हैं। जो लोग डिप्रेशन, चिंता या कमजोर इच्छाशक्ति से जूझ रहे हैं, उन्हें हनुमान अष्टक का पाठ करना चाहिए। इससे मन शांत रहता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

हनुमान अष्टक पाठ के नियम

हनुमान अष्टक का पाठ करने से पहले स्नान कर लें और लाल वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर लाल आसन बिछाएं। हनुमान जी को सिंदूर, लाल फूल, बूंदी के लड्डू और घी का दीपक अर्पित करें। पाठ सुबह या शाम दोनों समय किया जा सकता है। शुभ परिणाम के लिए 3, 5, 11 या 21 बार पाठ करें।

हनुमान अष्टक

बाल समय रवि भक्षी लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।

ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात ना टारो ।

देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो ।

को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 1 ॥

बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो ।

चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो ।

कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक निवारो ।

को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 2 ॥

अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो ।

जीवत ना बचिहौ हम सो जु, बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो ।

हेरी थके तट सिन्धु सबै तब, लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ।

को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 3 ॥

रावण त्रास दई सिय को सब, राक्षसी सों कही सोक निवारो ।

ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाए महा रजनीचर मारो ।

चाहत सीय असोक सों आगि सु, दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो ।

को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 4 ॥

बान लग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सुत रावन मारो ।

लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ।

आनि सजीवन हाथ दई तब, लछिमन के तुम प्रान उबारो ।

को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 5 ॥

रावन युद्ध अजान कियो तब, नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।

श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो ।

आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो ।

को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 6 ॥

बंधु समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पताल सिधारो ।

देबिहिं पूजि भलि विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो ।

जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत संहारो ।

को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 7 ॥

काज किये बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।

कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसे नहिं जात है टारो ।

बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होय हमारो ।

को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 8 ॥

दोहा

लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर ।

वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर ॥

हनुमान अष्टक का नियमित पाठ करने से भक्त को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से मजबूती मिलती है। जो भक्त सच्चे मन से इसका पाठ करते हैं, हनुमान जी उनकी हर संकट में रक्षा करते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

लेखक के बारे में

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नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


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डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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