Guru Purnima 2026: गुरु पूर्णिमा पर करें इन 5 गुरुओं की पूजा, मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद
गुरु पूर्णिमा 2026 पर माता, पिता, शिक्षक, आध्यात्मिक गुरु और जगतगुरु समेत इन 5 गुरुओं की पूजा करें। 29 जुलाई को मनाए जाने वाले इस पर्व पर आभार व्यक्त करने से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलेगा। जानिए सही पूजा विधि और महत्व।

भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा जीवन में राह दिखाने वाले सभी मार्गदर्शकों के प्रति आभार व्यक्त करने का पावन अवसर है। इस बार गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई 2026 बुधवार को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई शाम 06:18 बजे शुरू होकर 29 जुलाई रात 08:05 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार, यह पर्व 29 जुलाई को मनाया जाएगा। इस दिन पांच गुरुओं का सम्मान करना विशेष फलदायी माना जाता है।
प्रथम गुरु माता का सम्मान
बच्चे की पहली गुरु मां होती है। वह बोलना, चलना, सही-गलत का बोध और संस्कार सिखाती है। गुरु पूर्णिमा के दिन सबसे पहले माता के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। उन्हें उनकी पसंद का कपड़ा या कोई सामान भेंट करें। मां का आशीर्वाद जीवन में सुख और सुरक्षा लाता है। उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने से मानसिक शांति मिलती है।
द्वितीय गुरु पिता का आदर
पिता जीवन का दूसरा बड़ा गुरु होता है। वह दुनिया का सामना करना, संघर्ष, अनुशासन, कर्तव्य और मेहनत का मूल्य सिखाता है। इस दिन पिता के चरणों में प्रणाम करें। उन्हें माला या तिलक लगाकर सम्मान दें और उनकी दी हुई सीख पर चलने का संकल्प लें। पिता का आशीर्वाद साहस और दिशा प्रदान करता है।
तृतीय गुरु शिक्षक और विद्या गुरु
जो हमें किताबी ज्ञान, बौद्धिक क्षमता, कला और आजीविका कमाने योग्य बनाते हैं, वे विद्या गुरु हैं। गुरु पूर्णिमा के दिन स्कूल या कॉलेज के शिक्षकों से मिलकर या फोन पर आभार व्यक्त करें। उनका आशीर्वाद लें। ज्ञान देने वाले गुरु का सम्मान करने से बुद्धि और सफलता बढ़ती है। शिक्षा के प्रति समर्पण बनाए रखें।
चतुर्थ गुरु आध्यात्मिक गुरु
आध्यात्मिक गुरु हमें ईश्वर से जोड़ते हैं और मन को शांति का मार्ग दिखाते हैं। वे अज्ञानता से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। इस दिन दीक्षा गुरु के आश्रम जाकर उनकी पादुका या चरणों की पूजा करें। फल-फूल अर्पण करें और उनके दिए मंत्र का स्मरण करें। इससे आंतरिक शांति और भक्ति बढ़ती है।
पंचम परम गुरु का पूजन
गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। महर्षि वेद व्यास ने चार वेद और महाभारत की रचना की। भगवान दत्तात्रेय गुरुओं के गुरु माने जाते हैं और भगवान शिव आदिगुरु हैं। इस दिन महर्षि व्यास, दत्त महाराज, भगवान शिव या विष्णु की पूजा करें। गीता या रामायण का पाठ करें। परम गुरु का आशीर्वाद मोक्ष और ज्ञान की ओर ले जाता है।
गुरु पूर्णिमा का संदेश और लाभ
अगर औपचारिक गुरु ना हों, तो माता-पिता को ही सर्वोच्च गुरु मानकर उनकी सेवा करें। इससे पूर्ण पुण्य फल मिलता है। पांचों गुरुओं का सम्मान करने से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जीवन में कृतज्ञता का भाव रखने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और मार्गदर्शन मिलता रहता है।
गुरु पूर्णिमा 2026 पर इन 5 गुरुओं की पूजा करके आप सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। सच्चे मन से आभार व्यक्त करें, तो दिन विशेष फलदायी बनेगा।


