Gudi Padwa 2026: तो इस दिन है गुड़ी पड़वा? लगता है इन 2 चीजों का भोग, खास है इस त्योहार का महत्व
गुड़ी पड़वा को हिंदू नववर्ष का पहला दिन माना जाता है। इस त्योहार पर खास तरह का भोग लगता है। आज बात करेंगे इस त्योहार से जुड़े महत्व का और इस दिन लगाए जाने वाले भोग में क्या-क्या चीजें लगती हैं?

Gud Padwa 2026: धर्म में गुड़ी पड़वा के त्योहार का खास महत्व होता है। इसे एक तरह से नए साल की शुरुआत के रूप में देखा जाता है। इसे महाराष्ट्र, गोवा और दक्षिण भारत की ओर बड़े ही उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है। गुड़ी पड़वा वाले दिन से ही चैत्र नवरात्रि की भी शुरुआत हो जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन से एक नई शुरुआत होती है और हर घर में पॉजिटिव एनर्जी आती है। इसी वजह से इस त्योहार पर लोगों का उत्साह भी देखते बनता है। कई लोग इस दिन विशेष रूप से अपने घरों में पूजा-पाठ करवाते हैं। तो वहीं कई लोग दान-दक्षिणा भी करते हैं। फिलहाल तो आज गुड़ी पड़वा की तारीख से लेकर इसके महत्व के बारे में बात करेंगे।
कब है गुड़ी पड़वा?
गुड़ी पड़वा वाले दिन से ही चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है। हिंदू पंचांग के हिसाब से साल 2026 में गुड़ी पड़वा 19 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन गुरुवार पड़ रहा है। इस दिन लोग घर में गुड़ी की स्थापना करते हैं जोकि एक तरह की पताका या ध्वज होती है। साथ ही गुड़ी पड़वा पर खास भोग भी लगाया जाता है।
ये है गुड़ी पड़वा का शुभ मुहूर्त
बता दें कि हर साल गुड़ी पड़वा का त्योहार चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाते हैं। इस साल इस तिथि की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है। तिथि के शुरू होने का समय सुबह 6:52 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 4:52 बजे खत्म हो जाएगी। इसी वजह से गुड़ी पड़वा 19 मार्च को मनाई जाएगी। इसी के साथ इस तिथि को ही हिंदू नववर्ष का पहला दिन माना जाएगा।
गुड़ी पड़वा पर लगता है इस चीज का भोग
गुड़ी पड़वा के दिन लोग विशेष प्रकार का भोग लगाते हैं। इस दिन नीम की पत्तियों के साथ-साथ मिश्री का भोग लगता है। मुख्य रूप से इस दिन महाराष्ट्र की सबसे खास पूरन पोली बनाई जाती है। जिसे गुड़ और चने की दाल से बनाया जाता है। इसी के साथ साबूदाने की खीर और पूरी-चने का प्रसाद बनता है। इस भोग को कड़वे और मीठे का सबसे अच्छा संतुलन माना जाता है।
गुड़ी पड़वा का महत्व
पौराणिक कथाओं की मानें तो इस खास दिन पर ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। यही वजह है कि गुड़ी पड़वा को लोग नई शुरुआत के रूप में देखते है। इस दिन लोग भगवान से सुख-समृद्धि के साथ-साथ तरक्की और खुशहाली की कामना करते हैं।
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पिछले 8 महीनों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
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गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता
वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई, डेली और वीकली राशिफल
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