
Govardhan Puja 2025 mehtav: गोवर्धन पूजा क्यों की जाती है? जानें इसे करने से क्या मिलता है फल
संक्षेप: Govardhan puja kyu manayi jati hai: हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्रीकृष्ण व गोवर्धन पर्वत की पूजा का विधान है। इस दिन गाय की भी पूजा की जाती है। जानें गोवर्धन पूजा का त्योहार क्यों मनाया जाता है और गोवर्धन पूजा करने से क्या लाभ होता है।
Govardhan Puja kyu manate hai: अन्नकूट व गोवर्धन पूजा आज यानी 22 अक्टूबर, बुधवार को है। इस दिन गौ वंश की पूजा की जाती है। इस दिन कई प्रकार के नए अन्न से अन्नकूट बनाकर (गोवर्धन पर्वत) पूजा होती है। इसमें खास तौर पर कामधेनु रूपी गाय की विशेष तौर पर पूजा होती है। शास्त्रों में भी गायों को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है, जो सुख और समृद्धि प्रदान करती हैं। इस दिन गोवर्धन पूजा प्राकृतिक विपत्तियों से बचाव के लिए की जाती है। इस दिन गौ क्रीड़ा के साथ उत्सव का भी पारंपरिक प्रचलन है। जानें गोवर्धन पूजा का त्योहार क्यों मनाया जाता है और गोवर्धन पूजा करने से क्या फल मिलता है।

गोवर्धन पूजा का त्योहार क्यों मनाया जाता है: पंडित रामदेव पाण्डेय ने बताया कि पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल प्रदिपदा तिथि इस बार 21 अक्टूबर को शाम 4.51 मिनट से शुरू होकर 22 अक्टूबर की रात 7.10 बजे तक रहेगा। इसलिए उदयातिथि के अनुसार गोवर्धन पूजा बुधवार को की जाएगी। शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान कृष्ण ने इस दिन इंद्र के अतिवृष्टि कराने के कारण ब्रजवासियों को बचाने के लिए पूरा गोवर्धन पहाड़ ही अपनी बाएं हाथ की छोटी उंगली पर उठा लिया था। अतिवृष्टि और बाढ़ से बचने के लिए ब्रजवासियों ने अपनी पशु संपदा के साथ सपरिवार इस पर्वत के नीचे रहकर जान बचायी थी। तब से गोवर्धन पूजा मनाने का प्रचलन है। इस दिन विशेष रूप से भगवान कृष्ण की पूजा भी होती है।
गोवर्धन पूजा करने से क्या फल मिलता है: गोवर्धन पूजा पर गायों को स्नान कराकर उन्हें सजाया जाएगा। नए वस्त्र, सिंग में तेल आदि लगाकर नई रस्सी, नई घंटी के साथ उनकी पूजा होगी। गाय के गोबर से गोवर्धन बनाकर पूजा की जाएगी। गोवर्धन पूजा गायों और अन्न उत्पादन में उसके वंश (गौवंश)के योगदान को बताती है। इसके लिए प्रातःकाल गाय के गोबर से गोवर्धन बनाया जाता है, जिसे अनेक स्थानों पर मनुष्याकार बनाकर पुष्पों, लताओं आदि से सजाया जाता है। खास कर प्रदोष काल संध्या के समय यह पूजा होगी। पूजा के बाद गोवर्धन जी की सात परिक्रमाओं को करते हुए उनकी जयकार लगाई जाती है। परिक्रमा के समय एक व्यक्ति हाथ में जल का लोटा व अन्य खील (जौ) लेकर चलते हैं। पंडित रामदेव बताते हैं कि गोवर्धन पूजा करने से धन, धान्य, संतान और गोरस की वृद्धि होती है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की भी पूजा की जाती है।





