
गोवर्धन पूजा पर सुबह और शाम दोनों टाइम 2 घंटे 16 मिनट का शुभ मुहूर्त, जानें पूजा विधि और महत्व
गोवर्धन पूजा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह पूजा भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की स्मृति में मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि इंद्रदेव के क्रोध से ब्रजवासियों को बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर उन्हें सुरक्षित किया था।
Govardhan Puja 2025: गोवर्धन पूजा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह पूजा भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की स्मृति में मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि इंद्रदेव के क्रोध से ब्रजवासियों को बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर उन्हें सुरक्षित किया था। यही कारण है कि इस दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है और गायों का विशेष सम्मान किया जाता है। दीपावली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा को लेकर इस साल थोड़ी उलझन रही। वजह यह है कि कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा की शुरुआत 21 अक्टूबर 2025 की शाम 5:54 बजे से हो रही है और यह तिथि 22 अक्टूबर की रात 8:16 बजे तक रहेगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, गोवर्धन पूजा “उदया तिथि” में होती है, यानी जिस तिथि का सूर्योदय होता है, वही पूजा के लिए मान्य माना जाता है। इसलिए इस बार गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर, बुधवार को मनाई जाएगी।

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त (22 अक्टूबर 2025)
गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त - 06:26 ए एम से 08:42 ए एम
अवधि - 02 घण्टे 16 मिनट्स
गोवर्धन पूजा सायाह्नकाल मुहूर्त - 03:29 पी एम से 05:44 पी एम
अवधि - 02 घण्टे 16 मिनट्स
पूजा की विधि और महत्व
गोवर्धन पूजा की शुरुआत घर में या मंदिर में गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर की जाती है। इसे सजाने के लिए फूल, रंग और अन्य पारंपरिक सामग्री का प्रयोग किया जाता है। इस पर्वत की पूजा करने के बाद अन्नकूट भोग लगाया जाता है। अन्नकूट में विभिन्न प्रकार के अनाज, फल, मिठाई और पकवान शामिल किए जाते हैं। इस दिन 56 भोग या उससे अधिक पकवान तैयार कर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन भोग और अन्नकूट बनाता है और उसे भगवान को समर्पित करता है, उसके घर में सालभर अन्न और धन की कमी नहीं होती। यही वजह है कि इस दिन गरीबों और भिखारियों को अन्न और भोजन देना भी शुभ माना जाता है।
गोवर्धन पूजा का एक और महत्वपूर्ण पहलू गायों की सेवा और पूजा है। इस दिन घर में या मंदिरों में गायों को खास तौर पर पूजा जाता है। उन्हें खिलाया जाता है, साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है और उनकी सेवा करने को पुण्यकारी माना जाता है। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और लक्ष्मी तथा श्रीकृष्ण की कृपा बनी रहती है।
अन्नकूट और सामूहिक उत्सव
मंदिरों और समाज में गोवर्धन पूजा का उत्सव सामूहिक रूप से भी मनाया जाता है। इस दिन लोग मिलकर अन्नकूट तैयार करते हैं और उसे भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित करते हैं।





