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Govardhan Puja: गोवर्धन पूजा कब मनाना उत्तम? जानें पंडित जी से सही तारीख व मुहूर्त

Govardhan Puja: गोवर्धन पूजा कब मनाना उत्तम? जानें पंडित जी से सही तारीख व मुहूर्त

संक्षेप:

Goverdhan Puja kis din hai: दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है, लेकिन इस बार अमावस्या तिथि दो दिन होने के कारण गोवर्धन पूजा की तारीख को लेकर लोगों के बीच कंफ्यूजन है। जानें गोवर्धन पूजा किस दिन मनाना रहेगा उत्तम।

Tue, 21 Oct 2025 11:20 PMSaumya Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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2025 mein Govardhan puja kitne tarikh ko hai: हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। यह दीवाली के अगले दिन पड़ता है। लेकिन इस बार अमावस्या तिथि दो दिन होने के कारण गोवर्धन पूजा की तारीख को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति है। कुछ का कहना है कि गोवर्धन पूजा 21 अक्टूबर को है और कुछ 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा का पर्व होने की बात कह रहे हैं। अगर आप भी गोवर्धन पूजा की तारीख को लेकर कंफ्यूजन में हैं, तो जानें ज्योतिषाचार्य नरेंद्र उपाध्याय से कब मनाना उत्तम रहेगा गोवर्धन पूजा का पर्व।

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गोवर्धन पूजा कब मनाना रहेगा उत्तम: शास्त्रों के अनुसार, गोवर्धन पूजा सदैव कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाना उत्तम माना गया है। इस बार प्रतिपदा तिथि 21 अक्टूबर की शाम को प्रारंभ हो रही है। हिंदू धर्म में कोई भी पर्व या व्रत उदयातिथि में मनाने का विधान है। उदया प्रतिपदा तिथि 22 अक्टूबर को मान्य रहेगी, इसलिए गोवर्धन पूजा का त्योहार भी इसी दिन मनाना उत्तम रहेगा।

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गोवर्धन पूजा 2025 कब है: हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 21 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ होगी और 22 अक्टूबर को रात 08 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी। गोवर्धन पूजा उदयातिथि में 22 अक्टूबर 2025, बुधवार को मनाई जाएगी।

गोवर्धन पूजा मुहूर्त 2025: गोवर्धन पूजा का प्रात:काल शुभ मुहू्र्त सुबह 06 बजकर 26 मिनट से सुबह 08 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। पूजन की कुल अवधि 01 घंटे 16 मिनट की है। गोवर्धन पूजा सायाह्नकाल मुहूर्त दोपहर 03 बजकर 29 मिनट से शाम 05 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। पूजन की कुल अवधि 02 घंटे 16 मिनट की है।

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गोवर्धन पूजा का महत्व: गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों और जानवरों को भगवान इंद्र के प्रकोप से बचाया था। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सबकी रक्षा की थी। तभी से इस पर्वत को पूजनीय माना गया है और हर साल इस तिथि पर गोवर्धन पूजा की जाती है और अन्नकूट का भोग तैयार किया जाता है। अन्नकूट का भोग भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज को लगाया जाता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Saumya Tiwari

लेखक के बारे में

Saumya Tiwari
सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। यहां वह ज्योतिष और धर्म-अध्यात्म से जुड़ी खबरें देखती हैं। उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर की रहने वालीं सौम्या ने जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जर्नलिज्म में पीजी किया है। अपने करियर की शुरुआत हैदराबाद स्थित एक लोकल न्यूज पोर्टल से की और उसके बाद जनसत्ता, क्विंट हिंदी और जी न्यूज होते हुए पिछले चार सालों से लाइव हिन्दुस्तान में हैं। सौम्या पत्रकारिता जगत में पिछले सात सालों से कार्यरत हैं। नई जगहों पर घूमना, भजन सुनना और नए लोगों से जुड़ना बहुत पसंद है। बाकी वक्त बेटी के साथ सपने देखने में बीतता है। और पढ़ें
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