sawan
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शिव यानी कल्याणकारी। "शि" का अर्थ है, पापों का नाश करने वाला, जबकि "व" का अर्थ है, देने वाला । शिव-स्वरूप बताता है कि उनका रूप विराट और अनंत है,महिमा अपरंपार है ।

महा मृत्युंजय मंत्र (Mahamrityunjaya Mantra)

महामृत्युंजय मंत्र

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  • ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
    उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

शिव जी की आरती
  • ॐ जय शिव ओंकारा
  • ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
    ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव...

  • एकानन चतुरानन पंचानन राजे,
    हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव...

  • दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे,
    त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव...

  • अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी,
    त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ॐ जय शिव...

  • श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे
    सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव...

  • कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूल धर्ता,
    जगकर्ता जगभर्ता जग संहारकर्ता॥ ॐ जय शिव...

  • ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका,
    प्रणवाक्षर में शोभित यह त्रिवेद का टीका॥ ॐ जय शिव...

  • शिव ओंकारा शिव ओंकारा हर ऊंकारा,
    ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव...

  • ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
    ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव...

शिव चालीसा
  • ॥ दोहा ॥
    जय गणेश गिरिजा सुवन,
    मंगल मूल सुजान ।
    कहत अयोध्यादास तुम,
    देहु अभय वरदान ॥

  • ॥ चौपाई ॥
    जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
    सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥

  • भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
    कानन कुण्डल नागफनी के ॥

  • अंग गौर शिर गंग बहाये ।
    मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

  • वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
    छवि को देखि नाग मन मोहे ॥

  • मैना मातु की हवे दुलारी ।
    बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

  • कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
    करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

  • नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
    सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

  • कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
    या छवि को कहि जात न काऊ ॥

  • देवन जबहीं जाय पुकारा ।
    तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

  • किया उपद्रव तारक भारी ।
    देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

  • तुरत षडानन आप पठायउ ।
    लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

  • आप जलंधर असुर संहारा ।
    सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥

  • त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
    सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

  • किया तपहिं भागीरथ भारी ।
    पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

  • दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
    सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

  • वेद नाम महिमा तव गाई।
    अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥

  • प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
    जरत सुरासुर भए विहाला ॥

  • कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
    नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

  • पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
    जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

  • सहस कमल में हो रहे धारी ।
    कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥

  • एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
    कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

  • कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
    भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

  • जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
    करत कृपा सब के घटवासी ॥

  • दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
    भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥

  • त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
    येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

  • लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
    संकट से मोहि आन उबारो ॥

  • मात-पिता भ्राता सब होई ।
    संकट में पूछत नहिं कोई ॥

  • स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
    आय हरहु मम संकट भारी ॥

  • धन निर्धन को देत सदा हीं ।
    जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

  • अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
    क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

  • शंकर हो संकट के नाशन ।
    मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

  • योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
    शारद नारद शीश नवावैं ॥

  • नमो नमो जय नमः शिवाय ।
    सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

  • जो यह पाठ करे मन लाई ।
    ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

  • ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
    पाठ करे सो पावन हारी ॥

  • पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
    निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥

  • पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
    ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

  • त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
    ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

  • धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
    शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

  • जन्म जन्म के पाप नसावे ।
    अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥

  • कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
    जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

  • ॥ दोहा ॥
    नित्त नेम कर प्रातः ही,
    पाठ करौं चालीसा ।
    तुम मेरी मनोकामना,
    पूर्ण करो जगदीश ॥

  • मगसर छठि हेमन्त ॠतु,
    संवत चौसठ जान ।
    अस्तुति चालीसा शिवहि,
    पूर्ण कीन कल्याण ॥

शिव स्तुति
  • आशुतोष शशांक शेखर,
    चन्द्र मौली चिदंबरा,
    कोटि कोटि प्रणाम शम्भू,
    कोटि नमन दिगम्बरा।।

  • निर्विकार ओमकार अविनाशी,
    तुम्ही देवाधि देव,
    जगत सर्जक प्रलय करता,
    शिवम सत्यम सुंदरा।।

  • निरंकार स्वरूप कालेश्वर,
    महा योगीश्वरा,
    दयानिधि दानिश्वर जय,
    जटाधार अभयंकरा।।

  • शूल पानी त्रिशूल धारी,
    औगड़ी बाघम्बरी,
    जय महेश त्रिलोचनाय,
    विश्वनाथ विशम्भरा।।

  • नाथ नागेश्वर हरो हर,
    पाप साप अभिशाप तम,
    महादेव महान भोले,
    सदा शिव शिव संकरा।।

  • जगत पति अनुरकती भक्ति,
    सदैव तेरे चरण हो,
    क्षमा हो अपराध सब,
    जय जयति जगदीश्वरा।।

  • जनम जीवन जगत का,
    संताप ताप मिटे सभी,
    ओम नमः शिवाय मन,
    जपता रहे पञ्चाक्षरा।।

  • आशुतोष शशांक शेखर,
    चन्द्र मौली चिदंबरा,
    कोटि कोटि प्रणाम शम्भू,
    कोटि नमन दिगम्बरा ।।
    कोटि नमन दिगम्बरा..
    कोटि नमन दिगम्बरा..
    कोटि नमन दिगम्बरा..

भगवान शिव के त्यौहार एवं तिथियाँ

  • उपवास और त्यौहारतिथि
  • जया पार्वती व्रत प्रारंभरविवार, 26 जुलाई 2026
  • सावन का पहला सोमवार व्रतसोमवार, 3 अगस्त 2026
  • सावन संकष्टी चतुर्थीरविवार, 2 अगस्त 2026
  • पहला मंगला गौरी व्रतमंगलवार, 4 अगस्त 2026
  • सावन का दूसरा सोमवार व्रतसोमवार, 10 अगस्त 2026
  • दूसरा मंगला गौरी व्रतमंगलवार, 11 अगस्त 2026
  • कामिका एकादशीरविवार, 9 अगस्त 2026
  • सावन शिवरात्रिमंगलवार, 11 अगस्त 2026
  • हरियाली अमावस्याबुधवार. 12 अगस्त 2026
  • हरियाली तीजशनिवार, 15 अगस्त 2026
  • सावन का तीसरा सोमवार व्रत सोमवार, 17 अगस्त 2026
  • नाग पंचमीसोमवार, 17 अगस्त 2026
  • तीसरा मंगला गौरी व्रतमंगलवार, 18 अगस्त 2026
  • सावन का चौथा सोमवार व्रतसोमवार, 24 अगस्त 2026
  • श्रावण पुत्रदा एकादशीरविवार, 23 अगस्त 2026
  • चौथा मंगला गौरी व्रतमंगलवार, 25 अगस्त 2026
  • रक्षाबंधनशुक्रवार, 28 अगस्त 2026

भगवान शिव से जुड़ी कहानियाँ और पूजा विधि

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भगवान शिव के प्रमुख मंदिर:

  • मंदिरस्थान
  • काशी विश्वनाथ मंदिरवाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • केदारनाथ मंदिरकेदारनाथ, उत्तराखंड
  • महाकालेश्वर मंदिरउज्जैन, मध्य प्रदेश
  • सोमनाथ मंदिरप्रभास पाटन, गुजरात
  • त्र्यंबकेश्वर मंदिरनासिक, महाराष्ट्र
  • भीमाशंकर मंदिरपुणे, महाराष्ट्र
  • रामेश्वरम मंदिररामेश्वरम, तमिलनाडु
  • लिंगराज मंदिरभुवनेश्वर, ओडिशा
  • बैद्यनाथ मंदिरदेवघर, झारखंड
  • नागेश्वर ज्योतिर्लिंगद्वारका, गुजरात
  • कैलाश मंदिरएलोरा, महाराष्ट्र
  • ग्रिशनेश्वर मंदिरऔरंगाबाद, महाराष्ट्र
  • ओंकारेश्वर मंदिरखंडवा, मध्य प्रदेश
  • अमरनाथ गुफा मंदिरजम्मू और कश्मीर

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सवाल

  • महामृत्युंजय मंत्र का पाठ सावन सोमवार (Sawan Somwar) को क्यों शुभ माना जाता है?

    सावन सोमवार भगवान शिव को अति प्रिय होता है। इस दिन महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से विशेष फल प्राप्त होता है और मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।

  • महामृत्युंजय मंत्र का शाब्दिक अर्थ क्या है?

    महामृत्युंजय मंत्र शिव को तीन नेत्रों वाले, सुगंधित और जीवन को पुष्ट करने वाले रूप में पूजता है और मृत्यु के बंधन से मुक्ति की प्रार्थना करता है।

  • महामृत्युंजय मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?

    महामृत्युंजय मंत्र कम से कम 108 बार (एक माला) जप करना चाहिए। विशेष दिनों जैसे शिवरात्रि या सावन सोमवार को 1008 बार जप करना अति फलदायी होता है।

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