शेयर करेंआरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
गले में बंसी, मुख पर बिंदिया, नंद के आनंद नंदलाला की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
गायें जो गोपियाँ संग राधिका, कुंज गली में मुरलीधारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
कनक के फुल्लन से तन शोभित, उटी रखत बनमाली की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
श्री अंग पे पीताम्बर शोभित, उटी चुनरी पिताम्बर की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
लसत बेंदी शोभित शिर पर, नख पर कुंडल झलकत है॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
भ्रमर को चंचल तात टेढ़े-मेढ़े, कुंचित केश लटकत है॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
अंग-अंग में फूलन की वसना, मुद-मुदात मुरलीधारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
श्री अंग में वक्ष चन्दन शोभित, चारु चित्र बिनोद छवि की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

October lucky zodiac signs rashifal 2026: अक्टूबर का महीना ग्रहों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस महीने में कुछ राशियों का भाग्य उदय होने के साथ ही धन लाभ भी होगा। करियर में तरक्की प्राप्त होगी। जानें अक्टूबर महीने की लकी राशियां।

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जन्माष्टमी पर “आरती कुंजबिहारी की” सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय आरतियों में से एक है।
कृष्ण जी की आरती में दीपक, धूप, फूल, घंटी और भजन के साथ भगवान कृष्ण की स्तुति की जाती है।
जन्माष्टमी पर कृष्ण जी की आरती करने से भक्त के मन में भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, और भगवान का आशीर्वाद मिलता है।
जन्माष्टमी में कृष्ण जी की आरती मध्यरात्रि 12 बजे भगवान के जन्म के तुरंत बाद की जाती है। इस समय भक्त आरती और भजनों के साथ कान्हा का जन्मोत्सव मनाते हैं।