


भगवान श्री कृष्ण विष्णु जी केअवतार माने जाते हैं। भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ, वे देवकी और वसुदेव के पुत्र थे। भगवान कृष्ण द्वापर युग में बुधवार के दिन रोहिणी नक्षत्र में भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्मे थे। भागवत पुराण में भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया गया है। भगवान श्री कृष्ण की महाभारत के युद्ध में बहुत बड़ी भूमिका थी, उन्होंने अर्जुन का सारथी बनकर इस युद्ध में गीता का उपदेश दिया।
शेयर करेंआरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
गले में बंसी, मुख पर बिंदिया, नंद के आनंद नंदलाला की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
गायें जो गोपियाँ संग राधिका, कुंज गली में मुरलीधारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
कनक के फुल्लन से तन शोभित, उटी रखत बनमाली की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
श्री अंग पे पीताम्बर शोभित, उटी चुनरी पिताम्बर की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
लसत बेंदी शोभित शिर पर, नख पर कुंडल झलकत है॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
भ्रमर को चंचल तात टेढ़े-मेढ़े, कुंचित केश लटकत है॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
अंग-अंग में फूलन की वसना, मुद-मुदात मुरलीधारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
श्री अंग में वक्ष चन्दन शोभित, चारु चित्र बिनोद छवि की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥


Cancer Horoscope Today 13 July 2026 Aaj ka Kark Rashifal predictions: कर्क राशि राशि चक्र की चौथी राशि है। जिन जातकों के जन्म समय में चन्द्रमा कर्क राशि में गोचर कर रहा होता है, उनकी राशि कर्क मानी जाती है।

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जन्माष्टमी पर “आरती कुंजबिहारी की” सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय आरतियों में से एक है।
कृष्ण जी की आरती में दीपक, धूप, फूल, घंटी और भजन के साथ भगवान कृष्ण की स्तुति की जाती है।
जन्माष्टमी पर कृष्ण जी की आरती करने से भक्त के मन में भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, और भगवान का आशीर्वाद मिलता है।
जन्माष्टमी में कृष्ण जी की आरती मध्यरात्रि 12 बजे भगवान के जन्म के तुरंत बाद की जाती है। इस समय भक्त आरती और भजनों के साथ कान्हा का जन्मोत्सव मनाते हैं।