एक बार रत्न धारण करने के बाद बार-बार उतारते रहते हैं रत्न, क्या मिलेगा रत्न का पूरा लाभ?

Anuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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रत्न असली है या नकली इसे जानने के लिए आप को किसी अनुभवी रत्न एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए। आपको रत्न पहनने के बाद यथा शक्ति दान भी करना चाहिए। 

एक बार रत्न धारण करने के बाद बार-बार उतारते रहते हैं रत्न, क्या मिलेगा रत्न का पूरा लाभ?

रत्न असली है या नकली इसे जानने के लिए आप को किसी अनुभवी रत्न एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए। आपको रत्न पहनने के बाद यथा शक्ति दान भी करना चाहिए। क्या आप एक बार रत्न पहनने के बाद उतारते हैं, तो आपको बता दें कि ऐसा ना करें, इससे रत्न का पूरा लाभ आपको नहीं मिलता है। अगर आप रत्न को पहनने के बाद साफ करने के लिए कुछ देर उतारते हैं, तो कोई बात नहीं , लेकिन अगर आप एक घंटे से अधिक देर के लिए उतार रहे हैं, तो आपको उस रत्न के दिन फिर से शुद्धिकरण करके उसे धारण करना चाहिए। इस बात का भी ध्यान रखें कि रत्न खण्डित न हो। पहने हुए रत्न के खण्डित हो जाने, फट जाने या बदरंग. हो जाने पर उसे त्यागकर वैसा ही अन्य रत्न पहनना चाहिए। मन्त्र साथ ही शुद्ध उच्चारण से विधिपूर्वक रत्न को जाग्रत्‌ करके धारण करने से ही आपको इसका पूरा लाभ मिलता है। अनावश्यक रूप से अगर रत्नको बार-बार उतार रहे हैं तो इसके रश्मि-विकिरणमें बाधा पहुंचती है। इसके साथ दो विरोधाभासी रत्नों को एक साथ पहनने से अच्छे के बजाय नुकसान हो जाता है। यहां पढ़ें रत्नों से जुड़ी कुछ खास बातें, जो आपको जाननी चाहिए। तभी आपके द्वारा पहने गए रत्म आपको लाभ देंगे।

विरोधाभासी रत्नों को एक साथ न पहनें। प्राकृतिक लहरें, बादल और बुदबुदे आदि रत्न के दोष नहीं होते।

रत्न अगर अच्छे से अपना कार्य न कर रहा हो तो पुनः उसा शुद्धीकरण कर लें। फिर जाकर ये लाभ देने लगेगा।

र कोई रत्न किसी से चारीी किया हुआ, छीना हुआ, कीमत न चुकाया हुआ, रास्ते से मिला है, तो ऐसे रत्न को ना पहनें।

रत्न बहुमूल्य होते हैं । इन्हें खरीदनेकी क्षमता सभी की नहीं होती। उपरत्न अल्पमोली होते हैं, मगर वे भी अपना कार्य बखूबी करते हैं।

शनि का रत्न नीलम और शुक्र का रत्न हीरा विशेष प्रभाव वाले हैं, सभी को सहन नहीं होते। इसलिए कुछ दिन इसका टेस्ट करने के बाद ही पहनें।

आपको बता दें कि उचित धातुमें पहनने से रत्न के साथ धातु का लाभ भी मिलता है। इसलिए जिस रत्न को जिस धातु में पहनते हैं, उसी में बनवाओ।

अगर रत्न पहनते हैं तो उसमें आस्था भी रखें, तभी आपको पूरा लाभ मिलेगा।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

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शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय और अनुभव

अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


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