रत्न शास्त्र: पन्ना पहनते ही बुध ग्रह होगा मजबूत, मिलेंगे ये 3 लाभ, पहनते वक्त ना करें ये गलतियां
रत्नशास्त्र के हिसाब से पन्ना ऐसा रत्न है जोकि जिंदगी को पूरी तरह से बदल सकता है। इसे बुध ग्रह से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि इसे पहनते वक्त कुछ गलतियां नहीं करनी चाहिए।

रत्न शास्त्र की दुनिया काफी बड़ी है। इस दुनिया में कई ऐसे रत्न हैं जो किसी का भी जिंदगी को सही ट्रैक पर ला सकते हैं। पन्ना भी इन्हीं में एक है। शास्त्र के अनुसार इस रत्न का सीधा-सीधा संबंध बुध ग्रह से होता है। बुध ग्रह को कम्यूनिकेशन स्किल और दिमाग से जोड़कर देखात जाता है। साथ ही इसे धारण करने से सोच भी मजबूत बनती है। पन्ना देखने में खूबसूरत होता है और ऐसे में कई लोग इसे पहनने की इच्छा रखते हैं लेकिन ये हर किसी को सूट नहीं करता है। जो लोग बिजनेस से जुड़े हैं या फिर एजुकेशन के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं उनके लिए पन्ना लाभकारी साबित हो सकता है। आइए फिलहाल जानते हैं कि आखिर पन्ना पहनने से जिंदगी में कौन से 3 मेजर बदलाव आते हैं?
काम में बढ़ता है फोकस
रत्नशास्त्र के हिसाब से पन्ना धारण करते ही सोचने-समझने की क्षमता बेहतर हो जाती है। जिन लोगों को पढ़ाई या काम में ध्यान लगाने में परेशानी होती है उनके लिए यह रत्न फायदेमंद माना जाता है। फोकस बढ़ते ही जिंदगी के बाकी पहलू भी ठीक होने लगेंगे। जिन लोगों को किसी भी फैसले को लेने में दिक्कत आती है तो उनके लिए भी पन्ना काम आ सकता है।
करियर और बिजनेस में फायदा
पन्ना पहनने से कम्युनिकेशन स्किल बेहतर हो सकती है। जिन लोगों का भी काम बोलने, लिखने, पढ़ाने या बिजनेस से जुड़ा है उन्हें पन्ना पहनने की सलाह दी जाती है। पन्ना की एनर्जी इतनी असरदार होती है कि इससे नए-नए मौके मिलने की संभावना बढ़ जाती है। रत्न शास्त्र के हिसाब से पन्ना करियर और बिजनेस में काफी लाभदायक साबित होता है।
कॉन्फिडेंस बढ़ाने में मदद
शास्त्र के हिसाब से पन्ना कॉन्फिडेंस भी बूस्ट अप करता है। पन्ना पहनने से सेल्फ कॉन्फिडेंस भी अच्छा बढ़ता है। बुध के नाते पन्ना बोलने वाली क्षमता को प्रभावित करता है। जब इंसान कॉन्फिडेंट होता है तो वो खुलकर अपनी बात कह लेता है। साथ ही अपनी बात सामने रखने में लोगों के सामने झिझक कम होती है। वहीं सोच में क्लैरिटी तो आती है। ऐसे में कॉन्फिडेंस अपने आप ही बढ़ने लगता है।
पन्ना धारण करते वक्त ना करें ये गलती
पन्ना पहनते वक्त कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। पन्ना हो या फिर कोई और रत्न इसे ज्योतिष की सलाह के बिना कभी भी धारण नहीं करना चाहिए। एक ओर जहां पन्ना से कई लाभ मिल सकते हैं। वहीं इसे जब गलत राशि वाले लोग पहनते हैं तो ये खराब असर भी छोड़ सकता है। वहीं शास्त्र के हिसाब से गलत धातु में जड़वाकर पहनने से या फिर गलत उंगली में इसे धारण करने से बचना चाहिए। इसे हमेशा चांदी में बनवाकर छोटी उंगली में पहनने की सलाह दी जाती है।
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए रत्नशास्त्र विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो:
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न शास्त्र
फेंगशुई
हस्तरेखा शास्त्र


