रत्नशास्त्र: मूंगा पहनने से हो सकते हैं ये 3 बड़े नुकसान, जानें किन लोगों को करता है सूट?
रत्नशास्त्र की दुनिया में मूंगा का विशेष महत्व होता है। हालांकि ये इतना पावरफुल है कि अगर इसे कोई ऐसा इंसान पहन लें जिसे नहीं पहनना चाहिए तो ये बहुत नुकसान करता है। जानते हैं कि आखिर मूंगा किसे पहनना चाहिए और इससे होने वाले नुकसान क्या है?

रत्नशास्त्र की दुनिया में एक से बढ़कर एक रत्न होते हैं, जो लोगों की जिंदगी को आसान बनाते हैं। कुंडली देखकर कमजोर ग्रह की स्थिति को समझा जा सकता है। पुखराज, मोती, पन्ना, रूबी और मूंगा समेत कई ऐसे रत्न हैं जिनका संबंध किसी ना किसी ग्रह से जरूर होता है। बात करें मूंगा की तो इसका सीधा-सीधा संबंध मंगल ग्रह के साथ होता है। मूंगा को धारण करने से कई तरह के लाभ मिलते हैं हालांकि ये हर किसी को सूट नहीं करता है। ऐसे में ज्योतिषी की सलाह पर ही इसे धारण करना चाहिए। अगर गलत इंसान से मूंगा धारण कर लिया तो मंगल की एनर्जी की वजह से उनकी जिंदगी में कई तरह की दिक्कतें आने लगेंगी।
मूंगा से होने वाले नुकसान
अगर किसी ने बिना सलाह के ही शौकिया तौर पर ही मूंगा पहनने की कोशिश की तो उसे धीरे-धीरे इसका बुरा प्रभाव देखने को मिल सकता है। रत्न शास्त्र के अनुसार मूंगा से होने वाले नुकसान तो कई सारे हैं। आज हम उनमें से 3 सबसे बड़े नुकसान के बारे में बात करेंगे। अगर किसी ऐसे इंसान ने मूंगा पहन लिया, जिसे नहीं पहनना चाहिए तो सबसे पहले उसमें गुस्सा और चिड़चिड़ापन सबसे पहले बढ़ेगा। इसके बाद रिश्तों में तनाव जैसी स्थिति पैदा होने लगेगी। साथ ही इसका स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ने लगता है। अगर गलत इंसान मूंगा पहनता है तो उसे सिरदर्द और पेट दर्द जैसी दिक्कतें होती रहेंगी।
सिर्फ इन लोगों को पहनना चाहिए मूंगा
रत्नशास्त्र के हिसाब से मूंगा मेष, सिंह, धनु, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों को ही सूट करता है। हालांकि फिर भी एक बार ज्योतिषी को अपनी कुंडली जरूर दिखा देनी चाहिए। उनकी सलाह पर ही मूंगा को धारण करना चाहिए। मूंगा उन लोगों को नहीं पहनना चाहिए, जिनका मंगल पहसे से ही मजबूत और उच्च स्थिति में हो। ऐसे लोग मूंगा पहनकर मंगल से जुड़ी अपनी हर एनर्जी को डबल कर देते है, जिसके बाद इनकी लाभ में सिर्फ और सिर्फ दिक्कतें ही आती हैं। ऐसे में मूंगा धारण करने से पहले इन चीजों के बारे में सोच-समझ लेना चाहिए।
ऐसे करें धारण
मूंगा को मंगलवार के दिन पहनना फलदायी माना जाता है। इसकी अंगूठी को हमेशा दाहिने हाथ की अनामिका उंगली में पहनना चाहिए। पहले इसकी शुद्धीकरण करें और इसके बाद ऊं मंगलाय नमः मंत्र का 108 बार जाप करके इसे पहन लेना चाहिए।

लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पिछले 8 महीनों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
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शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता
वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई, डेली और वीकली राशिफल
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