Gemstone: किन लोगों को पहनना चाहिए माणिक्य रत्न? जानिए नियम व फायदे

Mar 07, 2026 03:37 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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रत्न शास्त्र में कुल 9 रत्नों का वर्णन मिलता है। ये रत्न खास ग्रहों से जुड़े होते हैं। इन्हीं में से एक रत्न है माणिक्य। इसका संबंध ग्रहों के राजा सूर्य से है।

Gemstone: किन लोगों को पहनना चाहिए माणिक्य रत्न? जानिए नियम व फायदे

रत्न शास्त्र में कुल 9 रत्नों का वर्णन मिलता है। ये रत्न खास ग्रहों से जुड़े होते हैं। इन्हीं में से एक रत्न है माणिक्य। इसका संबंध ग्रहों के राजा सूर्य से है। ऐसे में यह रत्न सेल्फ कॉन्फिडेंस, सम्मान और लीडरशिप क्वालिटी बढ़ाने वाला माना जाता है। लेकिन हर व्यक्ति के लिए ये रत्न शुभ हो, ऐसा जरूरी नहीं होता। ऐसे में आज हम जानेंगे कि माणिक्य रत्न को किसे पहनना चाहिए और इसे कब धारण करना चाहिए। चलिए इससे जुड़े सभी नियम जानते हैं।

माणिक्य रत्न
अक्सर लोग माणिक्य रत्न के पहचान को लेकर कंफ्यूज रहते हैं। माणिक्य अपने गहरे लाल रंग और चमक के कारण खास पहचान रखता हैष पुराने समय में राजा और योद्धा इसे शक्ति और सम्मान का प्रतीक मानते थे। सूर्य ग्रह से संबंधित इस रत्न को पहनने से कुंडली से सूर्य का दोष मिट जाता है, इ​तना ही नहीं व्यक्ति के यश और कीर्ति में जबरदस्त बढ़ोत्तरी होती है। साथ ही कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

किन लोगों को पहनना चाहिए
ज्योतिषियों के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर होता है या सूर्य से संबंधित दोष होते हैं। उनके लिए माणिक्य रत्न बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा मेष राशि के जातकों के लिए ये रत्न विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

माणिक्य रत्न पहनने के फायदे
- माणिक्य को पहनने से आत्मविश्वास, नेतृत्व शक्ति और मानसिक मजबूती मिलती है
- माणिक्य रत्न सेल्फ रिस्पेक्ट और सेल्फ कॉन्फिडेंस को बढ़ाता है।
- इसके अलावा क्रिएटिविटी, कम्यूनिकेशन स्किल्स और कार्यक्षमता में सुधार करता है।
- इतना ही नहीं ये रिश्तों में सामंजस्य बनाए रखने, नकारात्मक ऊर्जा से बचाव और मानसिक मजबूती देने में भी सहायक है।
- कुछ लोग इसे स्वास्थ्य से जुड़े फायदों, जैसे एनर्जी लेवल और ब्लड फ्लो में सुधार से भी जोड़ते हैं।

शुभ दिन
माणिक्य रत्न को शुक्ल पक्ष के रविवार को धारण करना सबसे शुभ माना जाता है। इसे सोने या तांबे की अंगूठी में पहनने की सलाह दी जाती है। ध्यान रखें कि धारण करते समय रत्न का स्किन से स्पर्श होना जरूरी माना जाता है। मंत्र जाप के साथ पहनने से इसके प्रभाव के बढ़ने की मान्यता है।

पहनने की विधि
- माणिक्य रत्न को सोना या तांबा में धारण करते हैं।
-माणिक्य को सूर्य की अंगुली यानि अनामिका में धारण करते हैं।
- इसे दाहिने हाथ की अनामिका अंगुली में माणिक्य पहनना चाहिए।
- इसे रविवार को सुबह 5 से 7 बजे के बीच पहनना चाहिए।
- धारण करने से पहले माणिक्य और सूर्य देव की पूजा करें।
- आप ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः मंत्र का 108 बार जाप करें।
- गंगाजल से माणिक्य को शुद्ध करें। हालांकि माणिक्य धारण करने से पहले किसी विशेषज्ञ ज्योतिषाचार्य की सलाह जरूर लें।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
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