Gemstone: पुखराज पहनने के बाद ना करें ये 4 गलतियां, हफ्ते में इस दिन धारण करने से मिलेगा दोगुना फायदा

Apr 04, 2026 04:27 pm ISTGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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Yellow Sapphire Rules: रत्न शास्त्र के हिसाब से पुखराज पहनने के बाद कुछ जरूरी बातों को ध्यान में रखना चाहिए। आइए जानते हैं कि आखिर इस रत्न को धारण करने के बाद हमें कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?

Gemstone: पुखराज पहनने के बाद ना करें ये 4 गलतियां, हफ्ते में इस दिन धारण करने से मिलेगा दोगुना फायदा

Avoid these mistakes after wearing Pukhraj: रत्न शास्त्र के हिसाब से सभी रत्न अपने आप में पावरफुल होते हैं। बात की जाए पुखराज की तो ये पावरफुल होने के साथ-साथ बेहद ही खूबसूरत भी होता है। इसे यलो सफायर भी कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में पुखराज को गुरु यानी बृहस्पति ग्रह से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि सही तरीके से इसे पहना जाए तो करियर, शादी और पैसों से जुड़े कामों में बाधा नहीं आती है। हालांकि पुखराज पहन लेने से ही चीजें सही नहीं हो जाती हैं। इसे सही तरीके से पहनना भी जरूरी होता है। साथ ही कुछ चीजें ऐसी हैं जोकि पुखराज धारण करने के बाद ध्यान में रखनी चाहिए।

पुखराज पहनने के बाद ना करें ये गलतियां

1. गलत दिन ना पहनें पुखराज

पुखराज को कभी भी गलत दिन नहीं पहनना चाहिए। तमाम लोग पुखराज मिलते ही उसे बिना किसी नियम और तरीके के ही धारण कर लेते हैं जोकि सही नहीं है। सही दिन पर पुखराज को पहनने से ही इसका पूरा-पूरा लाभ मिल पाएगा। स्नान करने के बाद ही पुखराज को धारण करें।

2. बिना शुद्धीकरण के ना पहनें पुखराज

पुखराज को कभी भी शुद्धीकरण के बिना नहीं पहनना चाहिए। नियम के हिसाब से पुखराज को पहनने से पहले इसे गंगाजल और कच्चे दूध से साफ कर लेना चाहिए। इसके बाद बाकी नियमों का पालन करके इसे सच्चे मन से धारण करना चाहिए। अगर बिना शुद्ध किए पुखराज को पहना जाए तो इससे पूरा लाभ नहीं मिलेगा।

3. गलत ऊंगली में ना पहनें

रत्न शास्त्र के हिसाब से पुखराज को कभी भी गलत उंगली में नहीं पहनना चाहिए। नियम के अनुसार इसे हमेशा तर्जनी उंगली में ही पहनना सही होता है। कुछ लोग कम जानकारी की वजह से पुखराज को किसी भी उंगली में पहन लेते हैं जोकि सही नहीं है। गलत उंगली में इसे पहनने से इसके फायदे कम हो सकते हैं। ऐसे में इसे सही उंगली में ही पहनना चाहिए।

4. बार-बार उताकर ना रखें इधर-उधर

आमतौर पर ऐसा कई बार होता है कि लोग रत्न वाली अंगूठी को निकालकर कहीं भी रख देते हैं। रत्न शास्त्र की नजर में पुखराज को पहनने के बाद इसे बार-बार उतारना सही नहीं माना जाता है। कई लोग किसी काम के दौरान या फिर नहाने के समय ही पुखराज को निकालकर रख देते हैं। ये तरीका सही नहीं है। अगर किसी वजह से आपको रत्न को उतारकर रखना हो तो उसे साफ जगह ही रखें। हालांकि इसे बार-बार ना निकालें।

पुखराज धारण करने का सही दिन

ज्योतिष शास्त्र और रत्न शास्त्र के हिसाब से पुखराज को गुरुवार के दिन ही पहनना चाहिए। दरअसल इस दिन गुरु का प्रभाव सबसे तेज माना जाता है। वहीं ये दिन भगवान विष्णु की पूजा को समर्पित होता है। ऐसे में गुरुवार के दिन पुखराज पहनना सबसे अच्छा होता है। हालांकि आप चाहे पुखराज पहनने वाले हैं या फिर कोई भी रत्न। किसी भी रत्न को पहनने से पहले अपनी कुंडली को किसी जानकार ज्योतिष को जरूर दिखा दें।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए रत्नशास्त्र विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Garima Singh

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गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।


परिचय और अनुभव

गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पिछले 8 महीनों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।


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गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।


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गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।


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व्यक्तिगत रुचियां

काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।


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