
किन लोगों को पहनना चाहिए लहसुनिया रत्न, जानें नियम व फायदे
ज्योतिष के मुताबिक किसी भी रत्न को पहनने से पहले विशेषज्ञ की जरूर सलाह लेनी चाहिए। वरना शुभ परिणाम की जगह अशुभ परिणाम झेलने पड़ सकते हैं। ऐसे में आज हम आपको एक बेहद पावरफुल रत्न के बारे में बताएंगे, जिन्हें पहनने से कई लाभ मिलते हैं। यह रत्न है लहसुनिया।
लोग अपनी तरक्की और भाग्योदय के लिए तरह-तरह के रत्न धारण करते हैं। लेकिन ज्योतिष के मुताबिक किसी भी रत्न को पहनने से पहले विशेषज्ञ की जरूर सलाह लेनी चाहिए। वरना शुभ परिणाम की जगह अशुभ परिणाम झेलने पड़ सकते हैं। ऐसे में आज हम आपको एक बेहद पावरफुल रत्न के बारे में बताएंगे, जिन्हें पहनने से कई लाभ मिलते हैं। यह रत्न है लहसुनिया।
कैसे पहचानें
लहसुनिया रत्न को को वैदूर्य रत्न भी कहा जाता है। इसकी सबसे खास पहचान है इसकी चमक और बीच में दिखने वाली सीधी रेखा होती है। ज्योतिष के मुताबिक लहसुनिया रत्न को केतु ग्रह से जोड़ा जाता है, जो एक छाया ग्रह माना जाता है और अचानक असर दिखाने के लिए जाना जाता है। ऐसे में इसे धारण करने से पहले नियम जरूर जान लें।
ध्यान रखें ये बातें
ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में केतु ग्रह कमजोर या अशुभ स्थिति में होता है, उनके लिए लहसुनिया रत्न बेहद फायदेमंद माना जाता है। यह रत्न केतु के नकारात्मक असर को कम करने में मदद करता है। खासतौर पर जिन लोगों को अचानक नुकसान, डर, मानसिक उलझन या बार-बार रुकावटों का सामना करना पड़ता है, उन्हें ज्योतिष सलाह के बाद लहसुनिया पहनना चाहिए।
इन राशियों के लिए शुभ और अशुभ
मेष, सिंह, धनु और मीन राशि वालों को आमतौर पर लहसुनिया पहनने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा गर्भवती महिलाएं, दिल या दिमाग से जुड़ी गंभीर परेशानी वाले लोग और जिनकी कुंडली में केतु दूसरे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो, उन्हें भी यह रत्न नहीं पहनना चाहिए।
कब और कैसे पहनें
- लहसुनिया को आमतौर पर चांदी या सोने में जड़वाकर पहना जाता है।
- इसे अंगूठी, ब्रेसलेट या पेंडेंट के रूप में धारण किया जा सकता है, बस ध्यान रखें कि स्टोन आपकी स्किन को छूता रहे।
- पहनने से पहले इसे दूध, पानी या गंगाजल से शुद्ध करना अच्छा माना जाता है।
- शनिवार या मंगलवार और शुक्ल पक्ष में इसे धारण करना बेहतर माना जाता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





