
रत्न शास्त्र: कुंडली में सूर्य ग्रह को मजबूत करने के लिए कौन सा रत्न पहनना चाहिए? जानिए नियम
अगर किसी जातक की कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर होती है तो उसे करियर संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सूर्य को मजबूत करने के लिए लोग कई सारे उपाय करते हैं। इन्हीं में से एक उपाय है रत्न पहनना। चलिए जानते हैं कि सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए कौन सा रत्न पहनना चाहिए?
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक ग्रह-नक्षत्रों का हमारे जीवन में बहुत प्रभाव पड़ता है। सूर्य की बात करें, तो ज्योतिष शास्त्र में इसे ग्रहों का राजा माना गया है। ये साहस और आत्मविश्वास के कारण माने जाते हैं। अगर किसी जातक की कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर होती है तो उसे करियर संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सूर्य को मजबूत करने के लिए लोग कई सारे उपाय करते हैं। इन्हीं में से एक उपाय है रत्न पहनना। चलिए जानते हैं कि सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए कौन सा रत्न पहनना चाहिए?
कुंडली में यदि सूर्य ग्रह मजबूत स्थिति में है तो व्यक्ति को करियर और समाज में खूब मान सम्मान और तरक्की मिलती है। वहीं, यदि सूर्य कमजोर स्थिति में है तो व्यक्ति को माणिक्य रत्न धारण करना चाहिए। इसका संबंध सूर्य से है। माणिक्य लाल रंग का होता है। जबकि श्रीलंका में पाया जाने वाला माणिक्य हल्का पीलापन लिए हुए होता है। इस रत्न को पहने से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है। इसके साथ ही व्यक्ति के भीतर ऊर्जा का संचार होता है। लेकिन इसे धारण करने से पहले किसी ज्योतिष से जरूर परामर्श लें।
कब धारण करें माणिक्य रत्न
- कुंडली में यदि लग्नेश सूर्य है, तब आप माणिक्य रत्न धारण कर सकते हैं।
- इसी के साथ यदि जातक की कुंडली में यदि सूर्य तृतीय भाव में हो, तो माणिक्य धारण कर सकते हैं।
- मेष, सिंह और धनु लग्न के जातक को इस रत्न को धारण करना चाहिए।
- इसके अलावा कर्क,वृश्चिक और मीन के जातक के लिए ये रत्न मध्यम परिणाम देने वाला होता है।
माणिक्य कैसे धारण करें
- माणिक्य को धारण करने का सबसे अच्छा दिन रविवार होता है। क्योंकि यह दिन सूर्य देव को समर्पित होता है।
- रविवार के दिन यदि पुष्य, कृतिका, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, में से किसी एक नक्षत्र में कम से कम पांच कैरेट का माणिक्य पहनें।
- इसे आप सोने या तांबे की अंगूठी में कनिष्ठिका अंगुली में सूर्योदय से लेकर सुबह 9:00 बजे तक विधिविधान से आप धारण कर सकते हैं।
-जब आप यह रत्न धारण करें तो सूर्य के मंत्रों का जप जरुर करते रहें।
-इस मंत्र का जप कम से कम 'ओम घृणिः सूर्याय नमः' का कम से कम 108 बार जप करना चाहिए
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
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परिचय और अनुभव
धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
न्यूमरोलॉजी
रत्न विज्ञान




