रत्न शास्त्र: धन और भाग्य में वृद्धि करता है यह रत्न, पर धारण करने से पहले जान लें नियम

Jan 15, 2026 04:43 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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पुखराज पीले रंग का होता है और ज्योतिष शास्त्र में इसका विशेष महत्व है। पुखराज को गुरु ग्रह (बृहस्पति) का रत्न माना जाता है और इसे पहनने से शिक्षा, ज्ञान, धन, और सफलता में वृद्धि होती है। इसे सोने या पीतल की अंगूठी में धारण किया जाता है।

रत्न शास्त्र: धन और भाग्य में वृद्धि करता है यह रत्न, पर धारण करने से पहले जान लें नियम

धार्मिक मान्यता है कि रत्न पहनने से स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति मिलती है। हर रत्न को पहनने के अपने फायदे और विधि है। इन्हीं में एक है पुखराज रत्न, जो बेहद कीमती होती है। यह पीले रंग का होता है और ज्योतिष शास्त्र में इसका विशेष महत्व है। मान्यता है कि पुखराज पहनने से धन और भाग्य दोनों में खूब वृद्धि होती है। चलिए इस रत्न को पहनने के नियम जानते हैं।

ज्योतिष शास्त्र में पुखराज को गुरु ग्रह (बृहस्पति) का रत्न माना जाता है और इसे पहनने से शिक्षा, ज्ञान, धन, और सफलता में वृद्धि होती है। इसे सोने या पीतल की अंगूठी में धारण किया जाता है। इसके अलावा इसे बृहस्पति ग्रह को मजबूत करने के लिए धारण किया जाता है।

किसके लिए होगा शुभ
पुखराज को मुख्य रूप से धनु और मीन राशि के जातकों के लिए शुभ माना गया है। जिनकी कुंडली में बृहस्पति ग्रह कमजोर हो या अशुभ प्रभाव डाल रहा हो, उन्हें पुखराज पहनने की सलाह दी जाती है। हालांकि रत्न को पहनने से पहले किसी ज्योतिष से जरूर परामर्श लें।

पहनने की विधि
पुखराज को गुरुवार के दिन पहनना सबसे शुभ माना जाता है।
पुखराज को सोने या पीतल की अंगूठी में जड़वाना चाहिए।
पुखराज पहनने से पहले इसे दूध, गंगाजल, शहद और तुलसी के पत्तों के जल में डुबोकर शुद्ध करें।
इसके बाद बृहस्पति मंत्र “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” का जाप करें।
अंगूठी को दाहिने हाथ की तर्जनी उंगल में सूर्योदय के समय पहनें।
रत्न का वजन व्यक्ति की जरूरत और कुंडली के अनुसार 5 से 7 रत्ती तक होना चाहिए।

लाभ
पुखराज पहनने से शैक्षिक कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
मान्यताओं के अनुसार, पुखराज धारण करने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है।
ऐसा कहा जाता है कि पुखराज पहनने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है।
स्वास्थ्य के लिए पुखराज धारण करना लाभकारी माना जाता है।
करियर और नौकरी में सफलता के लिए इसे धारण किया जाता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
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