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रत्न शास्त्र: नीलम पहनने के बाद ना करें ये गलतियां, वरना पड़ सकता है बुरा प्रभाव

रत्न शास्त्र: नीलम पहनने के बाद ना करें ये गलतियां, वरना पड़ सकता है बुरा प्रभाव

संक्षेप:

जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चल रही हो, उन्हें नीलम पहनने से लाभ हो सकता है। लेकिन अगर इसे सही नियम और विधि के साथ पहना जाए, तो कई गुना लाभ प्राप्त होता है। मगर इसे गलत तरीके से पहना जाए, तो इसके अशुभ परिणाम मिलते हैं।

Feb 05, 2026 06:10 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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रत्न शास्त्र में नीलम रत्न को एक प्रभावशाली और शक्तिशाली रत्न माना गया है। नीलम रत्न शनि ग्रह का कारक माना जाता है। ज्यादातर लोग नीलम को इसलिए पहनते हैं ताकि शनि दोष का प्रभाव कम हो सके। जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चल रही हो, उन्हें नीलम पहनने से लाभ हो सकता है। लेकिन अगर इसे सही नियम और विधि के साथ पहना जाए, तो कई गुना लाभ प्राप्त होता है। मगर इसे गलत तरीके से पहना जाए, तो इसके अशुभ परिणाम मिलते हैं। चलिए जानते हैं कि नीलम रत्न पहनने का सही तरीका क्या है और इससे पहनने के बाद किन गलतियों से बचना चाहिए।

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मान्यता है कि कोई भी रत्न हो, उसे पहनने से पहले किसी विशेषज्ञ ज्योतिष से जरूर परामर्श लें। क्योंकि हर राशि को नीलम रत्न सूट नहीं करती है। ऐसे में जान लें कि आपकी राशि के लिए कौन सा रत्न शुभ है।

नीलम पहनने की विधि
- नीलम रत्न को मध्यमा उंगली में पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है। क्योंकि नीलम रत्न का संबंध शनि ग्रह से है।
- इस रत्न को शनिवार का दिन सबसे शुभ माना जाता है।
- शनिवार के दिन आप ब्रह्म मुहू्र्त से लेकर शाम 7 बजे के बीच धारण कर सकते हैं।
- नीलम रत्न पहनने से पहले उसे सही तरह से गंगाजल और दूध से शुद्धि कर लें।
- नीलम पनते वक्त शनि देव के इस मंत्र का जाप कर सकते हैं-'ऊं शं शनैश्चराय नमः'
- इस मंत्र का जाप आप 108 बार कर सकते हैं।

पहनने के बाद ना करें काम
- नीलम रत्न पहनने के बाद उसे बार-बार नहीं उतारना चाहिए।
- नीलम धारण करने वाले व्यक्ति को तामसिक भोजन और शराब से परहेज करना चाहिए। इससे दुष्प्रभाव भी देखने पड़ते हैं।
- अक्सर लोग सोते समय, स्नान करते समय या व्यायाम करते समय अपने हाथों से अंगूठी में जड़ित रत्न को उतार देते हैं। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
- मान्यता है कि इससे ग्रह के साथ-साथ आपके ऊपर कई तरह की विपत्ति भी आ सकती है।
- अपना पहना हुआ रत्न भी किसी मित्र या रिश्तेदार को ट्रायल के लिए कभी नहीं देना चाहिए।
- नीलम को माणिक्य , मोती और मूंगा के साथ नहीं पहनना चाहिए, क्योंकि ये शनि के शत्रु ग्रह माने जाते हैं।

किन लोगों को पहना चाहिए नीलम रत्न
मान्यतानुसार, नीलम रत्न उन्हीं लोगों के लिए शुभ माना जाता है, जिनकी कुंडली में शनि ग्रह अच्छी स्थिति में हो। विशेषतौर पर मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए नीलम अत्यंत लाभकारी हो सकता है। क्योंकि शनि इन दोनों राशियों का स्वामी है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
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