
गायत्री मंत्र का जाप किस दिशा में बैठकर नहीं करना चाहिए? जानिए नियम व लाभ
पुराणों में कई शक्तिशाली मंत्रों की जिक्र किया गया है। इन्हीं में से एक मंत्र गायत्री मंत्र। शास्त्रों में इसका खास महत्व बताया गया है। इस मंत्र को लेकर मान्यता है कि इसके जाप से व्यक्ति के सारे पाप और सारे दुख खत्म हो जाते हैं। लेकिन इस मंत्र का जाप करते वक्त कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए।
हिंदू शास्त्रों और पुराणों में कई शक्तिशाली मंत्रों की जिक्र किया गया है। इन्हीं में से एक मंत्र गायत्री मंत्र। शास्त्रों में इसका खास महत्व बताया गया है। इस मंत्र को लेकर मान्यता है कि इसके जाप से व्यक्ति के सारे पाप और सारे दुख खत्म हो जाते हैं। लेकिन इस मंत्र का जाप करते वक्त कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए। ऐसे में आज हम जानेंगे गायत्री मंत्र के जाप का सही नियम क्या है।
गायत्री मंत्र क्या है?
गायत्री मंत्र के जाप के नियम जानने से पहले जानते हैं कि गायत्री मंत्र क्या है और इस मंत्र का मतलब क्या है। गायत्री मंत्र को सावित्री मंत्र भी कहते हैं। सावित्री पांच तत्वों की देवी हैं। इस मंत्र को स्वयं माता गायत्री ने महर्षि विश्वामित्र को बताया था। मंत्र है -
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।
इस मंत्र का मतलब है कि ॐ। मैं पृथ्वी, आकाश और स्वर्ग में सूर्य के तेज में चमकने वाले ईश्वर की सुंदरता का ध्यान करता हूं और उसे अपने अंदर धारण करता हूं।
नियम
गायत्री मंत्र का जाप आप कभी भी कर सकते हैं, लेकिन सुबह और शाम इस मंत्र का जाप करना लाभकारी माना जाता है। जाप करते सही समय के साथ-साथ दिशा का भी ख्याल रखना चाहिए। गायत्री मंत्र के जाप के लिए पूर्व दिशा की ओर मुख करके जाप करना सबसे अच्छा माना जाता है। पूर्व दिशा को सूर्य की दिशा माना जाता है और गायत्री मंत्र मुख्य रूप से सूर्य देवता की उपासना का प्रतीक है। इसके अलावा पूर्व दिशा ऊर्जा, प्राण शक्ति और आध्यात्मिक जागृति का भी प्रतीक है।
इस दिशा से बचें
इसके अलावा उत्तर दिशा के तरफ मुख कर भी गायत्री मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। ध्यान रहे कि गायत्री मंत्र का जाप दक्षिण दिशा में मुख करके नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसे नकारात्मक ऊर्जा की दिशा माना जाता है। पश्चिम दिशा भी सही नहीं है, लेकिन आवश्यक होने पर इसका उपयोग किया जा सकता है।
मंत्र जाप का तरीका
इस मंत्र का जाप दिन में तीन बार करना सबसे शुभ माना जाता है। गायत्री मंत्र का जप तुलसी या चंदन की माला से करें। जाप करते समय कुश के आसन पर बैठें। इस बात का ध्यान रखें कि मंत्र का जाप कभी भी सूर्यास्त के बाद ना करें। गायत्री मंत्र का जाप व्यक्ति के भीतर शांति, ज्ञान, और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह मंत्र न केवल आध्यात्मिक रूप से, बल्कि मानसिक और शारीरिक रूप से भी जीवन को समृद्ध बनाता है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





