गरुड़ पुराण: अंतिम संस्कार के बाद क्यों कराया जाता है मुंडन?

Dheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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मृत्यु के बाद सिर मुंडवाने की परंपरा केवल एक रिवाज नहीं, बल्कि श्रद्धा, शुद्धि, त्याग और आध्यात्मिक जागरूकता का समन्वय है, जो व्यक्ति को जीवन और मृत्यु के गहरे सत्य से जोड़ती है।

गरुड़ पुराण: अंतिम संस्कार के बाद क्यों कराया जाता है मुंडन?

हिंदू धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक कई संस्कार निभाए जाते हैं। मृत्यु के बाद आत्मा की शांति के लिए कई परंपराएं निभाई जाती है। 13 दिनों तक कई क्रियाएं की जाती हैं। इन्हीं परंपराओं में एक है सिर मुंडवाना। हिंदू परिवार में घर-परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होती है तो परिवार के पुरुष सदस्य सिर मुंडवाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर मृत्यु के बाद सिर क्यों मुंडवाया जाता है। गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद पुरुष सदस्यों के सिर मुंडवाने के कारण और महत्व के बारे में बताया गया है।

मोह से मुक्ति का प्रतीक

मान्यता है कि मृत्यु के बाद आत्मा अपने परिवार और प्रियजनों से तुरंत अलग नहीं हो पाती। उसका मोह बना रहता है और वह विशेष रूप से उन लोगों के आसपास रहती है, जो अंतिम संस्कार में शामिल होते हैं। ऐसे में सिर मुंडवाना एक तरह से सांसारिक बंधनों को त्यागने और आत्मा को यह संदेश देने का प्रतीक माना जाता है कि अब उसे आगे की यात्रा पर बढ़ना चाहिए। इससे आत्मा का मोह कम करने में सहायता मिलती है। हिंदू शास्त्रों में बालों को अहंकार और सुंदरता का प्रतीक माना गया है। परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होने पर मुंडन करवाना इस बात का संकेत है कि व्यक्ति सांसारिक सुखों और अपने अहंकार का त्याग कर रहा है। यह मृतक के प्रति विनम्रता और शोक प्रकट करने का एक तरीका है।

गरुड़ पुराण क्या कहता है

मान्यता के अनुसार, परिवार में किसी व्यक्ति के निधन के बाद पूरे घर पर ‘पातक’ यानी अशुद्धि का प्रभाव माना जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, सिर मुंडवाने के बाद ही व्यक्ति शुद्ध माना जाता है और तब वह पिंडदान व श्राद्ध जैसे अन्य अंतिम संस्कार से जुड़े कर्मकांड करने के योग्य होता है। साथ ही इससे नकारात्मकता और अशुद्धि का प्रभाव कम होता है और व्यक्ति दोबारा से सामान्य जीवन में लौटने के योग्य बनता है।

त्याग और वैराग्य का भाव

मुंडन केवल शोक प्रकट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन की नश्वरता को स्वीकार करने और वैराग्य अपनाने का भी संकेत देता है। यह संदेश देता है कि जीवन क्षणभंगुर है और व्यक्ति को मोह-माया से ऊपर उठकर धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलना चाहिए।

सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलू

इस परंपरा का एक सामाजिक पक्ष भी है। मुंडन के माध्यम से व्यक्ति समाज को यह संकेत देता है कि वह शोक की अवस्था में है। साथ ही, यह प्रक्रिया मानसिक रूप से भी व्यक्ति को शोक स्वीकार करने और उससे उबरने में सहायक होती है। इस प्रकार, मृत्यु के बाद सिर मुंडवाने की परंपरा केवल एक रिवाज नहीं, बल्कि श्रद्धा, शुद्धि, त्याग और आध्यात्मिक जागरूकता का समन्वय है, जो व्यक्ति को जीवन और मृत्यु के गहरे सत्य से जोड़ती है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
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