हिंदू परिवार में मृत्यु के तुरंत बाद क्यों नहीं जलाते हैं चूल्हा? गरुड़ पुराण से जानें सूतक के नियम

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हिंदू परिवार में मृत्यु के तुरंत बाद चूल्हा क्यों नहीं जलाया जाता? गरुड़ पुराण में बताए गए सूतक काल के नियम, कारण और महत्व जानिए। मृत्यु के बाद चूल्हा नहीं जलाने की परंपरा आत्मा की शांति, परिवार के शोक और घर की शुद्धि के लिए है। सूतक काल में क्या करें और क्या ना करें, विस्तार से पढ़ें।

हिंदू परिवार में मृत्यु के तुरंत बाद क्यों नहीं जलाते हैं चूल्हा? गरुड़ पुराण से जानें सूतक के नियम

हिंदू परिवार में मृत्यु के तुरंत बाद चूल्हा क्यों नहीं जलाया जाता? गरुड़ पुराण में बताए गए सूतक काल के नियम, कारण और महत्व जानिए। मृत्यु के बाद चूल्हा नहीं जलाने की परंपरा आत्मा की शांति, परिवार के शोक और घर की शुद्धि के लिए है। सूतक काल में क्या करें और क्या ना करें, विस्तार से पढ़ें।

सनातन धर्म में जीवन के हर चरण के लिए स्पष्ट नियम और संस्कार निर्धारित किए गए हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक कुल 16 संस्कारों का वर्णन मिलता है, जिनमें अंतिम संस्कार यानी अंत्येष्टि सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। मृत्यु के बाद परिवार को शोक, शुद्धि और आत्मा की शांति के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना पड़ता है। इन नियमों में सबसे प्रमुख है - मृत्यु के तुरंत बाद चूल्हा ना जलाना। गरुड़ पुराण में इस पर विस्तार से चर्चा की गई है। आइए जानते हैं कि मृत्यु के बाद चूल्हा क्यों नहीं जलाया जाता और सूतक काल के नियम क्या हैं।

गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद के नियम

गरुड़ पुराण हिंदू धर्म का प्रमुख ग्रंथ है, जिसमें मृत्यु, प्रेत योनि, आत्मा की यात्रा और श्राद्ध विधि का विस्तृत वर्णन है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मृत्यु के बाद कुछ दिनों तक घर में सामान्य दैनिक क्रियाएं जैसे खाना बनाना, उत्सव मनाना या सामान्य जीवन जीना उचित नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य मृतक की आत्मा को शांतिपूर्ण यात्रा कराना और परिवार को शोक मनाने का समय देना है।

आत्मा की शांति के लिए चूल्हा नहीं जलाना

मृत्यु के बाद व्यक्ति की आत्मा कुछ समय तक घर और परिवार के आस-पास भटकती रहती है। गरुड़ पुराण के अनुसार, इस दौरान अगर घर में खाना बनाया जाए या चूल्हा जलाया जाए, तो आत्मा को अशांति होती है। वह सोचती है कि परिवार ने उसे इतनी जल्दी भुला दिया। इसलिए मृत्यु के तुरंत बाद चूल्हा ना जलाकर परिवार शोक और संवेदना व्यक्त करता है। इससे आत्मा को शांति मिलती है और वह आगे की यात्रा के लिए तैयार होती है।

सूतक काल क्या है और इसका महत्व

मृत्यु के बाद 3 से 13 दिनों तक का समय सूतक काल कहा जाता है। इस दौरान घर में कई सख्त नियमों का पालन किया जाता है, जिनमें चूल्हा नहीं जलाना, नया कपड़ा ना पहनना, उत्सव नहीं मनाना और बाहरी लोगों से कम संपर्क रखना शामिल है। सूतक काल का उद्देश्य मृतक की आत्मा को शांति प्रदान करना होता है।

चूल्हा कब और कैसे जलाया जाता है?

सूतक काल समाप्त होने के बाद परिवार के सदस्य मिलकर घर की सफाई करते हैं। फिर ब्राह्मण द्वारा शुद्धि की विधि कराई जाती है। इसके बाद ही चूल्हा जलाया जाता है। पहला भोजन सादा और सात्विक होना चाहिए। कई परिवार सूतक के बाद हवन या पूजा करके चूल्हा जलाते हैं, ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो। हालांकि, जगह-जगह के अनुसार अलग-अलग परंपराएं भी चलन में हैं।

सूतक के नियम

आज के व्यस्त जीवन में सूतक के पूरे नियमों का पालन करना चुनौतीपूर्ण लग सकता है, लेकिन गरुड़ पुराण की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। मृत्यु के तुरंत बाद चूल्हा नहीं जलाना और परिवार को एक साथ शोक मनाने का समय देना भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। इससे परिवार के सदस्यों के बीच एकता बढ़ती है और मृतक की आत्मा को शांति मिलती है।

गरुड़ पुराण हमें सिखाता है कि मृत्यु जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक यात्रा का आरंभ है। चूल्हा न जलाने का नियम सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि सम्मान, शुद्धि और संवेदना का प्रतीक है। इन नियमों का पालन करके हम अपने पूर्वजों का सम्मान कर सकते हैं और स्वयं भी शांतिपूर्ण जीवन जी सकते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण

नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


विस्तृत बायो परिचय और अनुभव

डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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