Garud Puran: चोरी, विश्वासघात समेत ये 7 महापाप करने वाले लोगों को भोगना पड़ता है नरक का कष्ट
Garuda Purana: गरुड़ पुराण के अनुसार चोरी, विश्वासघात, ब्रह्महत्या, गौहत्या जैसे 7 महापाप करने वाले व्यक्ति मृत्यु के बाद नरक में भयंकर यातनाएं भोगते हैं। जानें इन पापों का फल और बचाव के उपाय।

गरुड़ पुराण हिंदू धर्म के प्रमुख पुराणों में से एक है, जिसमें मृत्यु के बाद की यात्रा, कर्मों के फल और नरक-स्वर्ग का विस्तार से वर्णन मिलता है। इसमें भगवान विष्णु गरुड़ जी को बताते हैं कि मनुष्य के अच्छे-बुरे कर्मों के अनुसार उसे 84 लाख योनियों में भटकना पड़ता है। पाप कर्म करने वाले व्यक्ति को नरक की भयंकर यातनाएं भोगनी पड़ती हैं, जबकि पुण्य करने वाले को सुखद गति प्राप्त होती है। गरुड़ पुराण में कुछ ऐसे महापापों का उल्लेख है, जिन्हें करने वाले व्यक्ति को यमलोक में अत्यधिक कष्ट सहने पड़ते हैं।
84 लाख योनियों का चक्र
गरुड़ पुराण के अनुसार, जीव अपने कर्मों के आधार पर विभिन्न योनियों में जन्म लेता है। वृक्ष, लता, पर्वत, कीट, पशु, पक्षी और जलचर योनियों में भटकने के बाद अंत में मनुष्य योनि प्राप्त होती है। पापी व्यक्ति को बार-बार नरक भोगकर फिर नई योनियों में जन्म लेना पड़ता है। इस चक्र से मुक्ति तभी संभव है, जब मनुष्य सत्कर्म करे और पापों से दूर रहे।
वैतरणी नदी और पापियों की दशा
गरुड़ पुराण में वैतरणी नदी का भयानक वर्णन है। यह नदी पापियों को यमलोक जाते समय पार करनी पड़ती है। इसमें उबलता पानी, खून और मवाद भरा होता है। ब्रह्महत्या, गोहत्या, गर्भपात, चोरी, विश्वासघात, दूसरे का धन हड़पने जैसे महापाप करने वाले इस नदी में फेंके जाते हैं और भयंकर पीड़ा सहते हैं।
ब्रह्महत्या और गोहत्या - सबसे बड़ा पाप
गरुड़ पुराण में ब्रह्महत्या और गोहत्या को सबसे बड़ा महापाप बताया गया है। ब्राह्मण की हत्या करने वाला या गाय की हत्या करने वाला व्यक्ति नरक में अत्यधिक यातनाएं भोगता है। गर्भपात को भी ब्रह्महत्या के समान पाप माना गया है। ऐसे पापी को यमदूत लोहे के कीलों वाली भूमि पर घसीटते हैं और बार-बार मारते हैं।
विश्वासघात और चोरी का भयानक दंड
जो व्यक्ति किसी का विश्वास तोड़ता है, धोखा देता है या दूसरे का धन हड़प लेता है, उसे गरुड़ पुराण में विशेष नरक भोगना पड़ता है। यमदूत ऐसे व्यक्ति को गर्म तेल के कुंड में डालते हैं। चोरी करने वाले को बार-बार लोहे के कीलों से भेदा जाता है। विश्वासघात करने वाले को अपने ही विश्वासघात का दर्द बार-बार सहना पड़ता है।
गुरु, देवता और वेदों की निंदा
गुरु, देवता, वेद-पुराण और शास्त्रों की निंदा करने वाले व्यक्ति को भी नरक की यातनाएं भोगनी पड़ती हैं। गरुड़ पुराण में कहा गया है कि ऐसे लोग यमलोक में दक्षिण द्वार से प्रवेश करते हैं और उनके कर्मों का कठोर फैसला होता है।
आग लगाकर दूसरों को कष्ट पहुंचाना
घर, गांव या जंगल में आग लगाकर दूसरों को कष्ट पहुंचाने वाले व्यक्ति को गरुड़ पुराण में महापापी कहा गया है। यमदूत ऐसे व्यक्ति को अग्निकुंड में डालते हैं। जब वह जलन से तड़पकर पानी मांगता है, तो उसे खौलता तेल पिलाया जाता है। शरीर के अंदरूनी अंग जलने लगते हैं और वह बोलने की स्थिति में भी नहीं रहता है।
नरक से मुक्ति का एकमात्र मार्ग
गरुड़ पुराण साफ-साफ बताता है कि नरक से मुक्ति केवल अच्छे कर्मों, दान, पुण्य और भगवान का भजन करने से ही संभव है। पापों का प्रायश्चित करके और सत्कर्म अपनाकर ही जीव इस चक्र से बाहर निकल सकता है।
गरुड़ पुराण हमें चेतावनी देता है कि पापों का फल भोगना तय है। चोरी, विश्वासघात, हत्या, निंदा और दूसरों को कष्ट पहुंचाने जैसे महापाप करने वाले व्यक्ति को नरक की भयंकर यातनाएं सहनी पड़ती हैं। इसलिए जीवन में सत्कर्म करें, दूसरों का अहित ना करें और भगवान का भजन करें। इससे ना सिर्फ इस जीवन में सुख मिलता है बल्कि मृत्यु के बाद भी अच्छी गति प्राप्त होती है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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