
गरुड़ पुराण के अनुसार मौत के समय बस ये 4 चीजें हों पास, तो सीधे मरने वाले को मिलता है स्वर्ग
Garuda Purana: गरुड़ पुराण के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के प्राण त्यागते समय ये चार पवित्र वस्तुएं उसके पास होती हैं, तो स्वयं यमदूत भी उसके पास नहीं आते और आत्मा को बैकुंठ या स्वर्ग लोक में जगह मिल जाती है।
Garuda Purana: जीवन का अंतिम सत्य मृत्यु है। सनातन धर्म में यह मान्यता है कि मृत्यु के बाद आत्मा अपने कर्मों के अनुसार स्वर्ग या नर्क जाती है। हर व्यक्ति अपने जीवनकाल में यही कोशिश करता है कि वह इतने पुण्य कमाए कि उसे नर्क का कष्ट न भोगना पड़े। लेकिन, क्या सिर्फ दान-पुण्य से ही स्वर्ग की गारंटी मिल जाती है?
धार्मिक ग्रंथों में सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले गरुड़ पुराण में मृत्यु और उसके बाद की आत्मा की यात्रा का विस्तार से वर्णन किया गया है। यह पुराण भगवान विष्णु और पक्षीराज गरुड़ के बीच हुए संवाद पर आधारित है। गरुड़ पुराण के नौवें अध्याय में भगवान विष्णु ने स्वयं पक्षीराज गरुड़ को एक ऐसा विशेष उपाय बताया है, जिससे व्यक्ति को अपने कर्मों के अच्छे-बुरे फल भोगने से पहले ही, मृत्यु के समय कुछ विशेष चीजें पास होने पर सीधे स्वर्ग में स्थान मिल जाता है।
भगवान विष्णु के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के प्राण त्यागते समय ये चार पवित्र वस्तुएं उसके पास होती हैं, तो स्वयं यमदूत भी उसके पास नहीं आते और आत्मा को बैकुंठ या स्वर्ग लोक में जगह मिल जाती है। यहां तक कि अगर उस व्यक्ति का श्राद्ध कर्म करने वाला कोई न भी हो, तब भी उसे मुक्ति मिल जाती है।
आइए जानते हैं गरुड़ पुराण में बताई गई उन चार शुभ चीजों के बारे में-
1. तुलसी का पौधा
हिंदू धर्म में तुलसी को देवी का रूप माना जाता है और इसे अत्यंत पवित्र स्थान दिया गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार, जिस घर में तुलसी का पौधा होता है, वह घर तीर्थस्थल के समान होता है।
उपाय: अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु करीब हो, तो परिवार के लोगों को उस व्यक्ति को तुलसी के पौधे के पास लेटा देना चाहिए। मरने वाले व्यक्ति के माथे पर तुलसी की मंजरी (बीज वाला हिस्सा) और कुछ पत्ते रख देने चाहिए। साथ ही, उसके मुंह में भी तुलसी का पत्ता डालना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि तुलसी की मंजरी से युक्त होकर जो व्यक्ति प्राण त्यागता है, वह सीधे स्वर्ग लोक जाता है और यमलोक के कष्टों से बच जाता है।
2. गंगाजल
गंगाजल को सभी पापों को हरने वाला और सबसे पवित्र माना गया है, क्योंकि यह भगवान विष्णु के चरणों से उत्पन्न हुआ है।
उपाय: भारतीय समाज में यह सदियों पुरानी परंपरा है कि मृत्यु के अंतिम क्षणों में व्यक्ति के मुख में गंगाजल डाला जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, जो लोग मृत्यु को करीब जानकर मरने वाले व्यक्ति के मुख में गंगाजल डालते हैं, वे उस व्यक्ति पर बहुत बड़ा उपकार करते हैं। गंगाजल धारण करके जो व्यक्ति प्राण त्यागता है, वह भी स्वर्ग का अधिकारी हो जाता है। पुराण में यह भी कहा गया है कि दाह संस्कार के बाद अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने से जब तक अस्थियां गंगाजल में रहती हैं, तब तक आत्मा स्वर्ग में सुख भोगती है।
3. तिल का दान
तिल को भी धार्मिक कार्यों में बेहद पवित्र माना गया है। भगवान विष्णु ने गरुड़ जी से कहा है कि तिल की उत्पत्ति उनके पसीने से हुई है, इसलिए यह बहुत शुद्ध है।
उपाय: मृत्यु के समय व्यक्ति के हाथों से तिल का दान करवाना चाहिए। यह दान असुरों, दैत्यों और दानवों को दूर भगाता है। इसके अलावा, सद्गति प्राप्त करने के लिए मरने वाले के सिरहाने में काले तिल रखना भी शुभ माना गया है। तिल के दान और पास होने से व्यक्ति को मुक्ति प्राप्त होती है।
4. कुश का आसन
कुश एक प्रकार की पवित्र घास होती है, जिसका इस्तेमाल हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में अनिवार्य रूप से किया जाता है। भगवान विष्णु ने बताया है कि कुश की उत्पत्ति उनके रोम से हुई है।
उपाय: मृत्यु के समय, तुलसी के पौधे के पास जमीन पर कुश का आसन बिछाकर व्यक्ति को सुला देना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति कुश के आसन पर प्राण त्यागता है, तो उसे बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। सबसे खास बात यह है कि ऐसा व्यक्ति, यदि संतानहीन भी हो और उसका श्राद्ध कर्म करने वाला कोई न भी हो, तब भी वह बिना किसी बाधा के मुक्ति को प्राप्त कर लेता है।
गरुड़ पुराण में ये उपाय मनुष्य को मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाने और सद्गति देने के लिए बताए गए हैं, लेकिन यह भी स्पष्ट किया गया है कि व्यक्ति को अपने जीवन में अच्छे कर्मों को अवश्य करना चाहिए।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





