Garud Puran: गलती से भी मृत परिजन के इन 3 चीजों का ना करें इस्तेमाल, गरुड़ पुराण से जान लें इसके नियम

Navaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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गरुड़ पुराण के अनुसार मृत परिजन के कपड़े, गहने और घड़ी जैसी चीजों का इस्तेमाल करने से घर में नेगेटिविटी और अशांति आ सकती है। जानें गरुड़ पुराण में बताए नियम, इन 3 चीजों का क्या करें और मृतक की आत्मा को शांति देने के सही उपाय।

Garud Puran: गलती से भी मृत परिजन के इन 3 चीजों का ना करें इस्तेमाल, गरुड़ पुराण से जान लें इसके नियम

हिंदू धर्म के 18 पुराणों में गरुड़ पुराण मृत्यु, मृतात्मा और उसके बाद की यात्रा का विस्तार से वर्णन करने वाला प्रमुख ग्रंथ है। इसमें मृत व्यक्ति की वस्तुओं के उपयोग को लेकर स्पष्ट नियम दिए गए हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद भी व्यक्ति की वस्तुओं में उसकी सूक्ष्म ऊर्जा कुछ समय तक बनी रहती है। इन्हें गलती से इस्तेमाल करने से घर में नकारात्मकता, मानसिक अशांति और बाधाएं आ सकती हैं। इसलिए इन नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।

मृतक के कपड़ों का क्या करें?

गरुड़ पुराण में सबसे सख्त नियम मृतक के कपड़ों को लेकर है। मृत व्यक्ति के कपड़े, चादर, गद्दा या बिस्तर का इस्तेमाल परिवार के सदस्यों को नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से मृतक की सूक्ष्म ऊर्जा जीवित लोगों को प्रभावित करती है, जिससे डरावने सपने, उदासी, चिड़चिड़ापन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

नियम: मृत्यु के बाद इन कपड़ों को गरीबों, ब्राह्मणों या आश्रम में दान कर देना चाहिए। इससे मृतक की आत्मा को शांति मिलती है और मोह का बंधन टूटता है।

गहनों और आभूषणों के नियम

मृतक के गहनों को लेकर नियम थोड़े लचीले हैं, लेकिन पूरी तरह स्वतंत्र नहीं। अगर गहने सोने या चांदी के हैं और मृतक ने स्वयं किसी को उपहार स्वरूप दिए थे, तो उनका उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, अगर गहनों के साथ मृतक का गहरा भावनात्मक लगाव था, तो उन्हें सीधे पहनने की बजाय गलाकर नया आभूषण बनवाएं या शुद्धिकरण पूजा करवाकर उपयोग करें।

गरुड़ पुराण के अनुसार, बिना शुद्ध किए गहनों का इस्तेमाल करने से मानसिक अशांति और आर्थिक बाधाएं आ सकती हैं।

मृतक की घड़ी और अन्य वस्तुओं का नियम

समय का प्रतीक होने के कारण मृतक की घड़ी, पेन, चश्मा या दैनिक इस्तेमाल की अन्य चीजों को भी नियमित रूप से इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। गरुड़ पुराण में कहा गया है कि इन चीजों में मृतक की ऊर्जा लंबे समय तक रह सकती है, जो जीवित लोगों के समय और भाग्य को प्रभावित करती है। इन चीजों को दान कर देना चाहिए।

मृतक की यादों को कैसे संजोएं?

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत व्यक्ति की यादों को उनकी चीजों को संभालकर रखने में नहीं, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलने और उनके नाम पर दान-पुण्य करने में है। मृत्यु के 13वें दिन या श्राद्ध के समय इन वस्तुओं का दान करें। मृतक के नाम पर ब्राह्मण भोजन कराएं। तुलसी दल, गंगाजल और दीपदान से उनकी आत्मा को शांति पहुंचाएं।

गरुड़ पुराण हमें सिखाता है कि मृत्यु के बाद मोह त्यागना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। मोह और वस्तुओं से अलग होकर सही कर्म करने से ही आत्मा को मुक्ति मिलती है। इन नियमों का पालन करने से परिवार में शांति बनी रहती है और मृतक की आत्मा को सद्गति प्राप्त होती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


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डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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