Garud Puran: पिता के जीवित रहते बेटा भूलकर भी ना करें ये 5 काम, नहीं तो भुगतने पड़ेंगे गंभीर परिणाम

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गरुड़ पुराण के अनुसार, पिता के जीवित रहते बेटा भूलकर भी ये 5 काम ना करें, वरना गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। पिता का सम्मान, पितृकर्म, दान और घर की जिम्मेदारी से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें जानिए। संस्कार और मर्यादा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण सलाह।

Garud Puran

हिंदू धर्म और गरुड़ पुराण में पिता को साक्षात देवता माना गया है। जब तक पिता जीवित हैं, वे ही परिवार के मुख्य देवता हैं। उनकी उपस्थिति में पुत्र को कुछ कामों से बचना चाहिए, अन्यथा यह कुल की परंपरा और पितृऋण का अपमान माना जाता है। गरुड़ पुराण स्पष्ट रूप से बताता है कि पिता के जीवित रहते कुछ जिम्मेदारियां पुत्र पर नहीं आनी चाहिए।

घर के मुखिया बनने की गलती

पिता के जीवित रहते बेटा घर का मुखिया बनने की कोशिश न करे। भले ही बेटा कमाने लगा हो और सारा खर्च वह उठा रहा हो, लेकिन महत्वपूर्ण फैसले, पूजा-पाठ या परिवार की बड़ी जिम्मेदारियां पिता की अनुमति और उपस्थिति में ही होनी चाहिए। गरुड़ पुराण कहता है कि पिता के रहते बेटा मुखिया बन गया, तो घर में कलह और आर्थिक अस्थिरता आ सकती है।

पितृकर्म नहीं करने का नियम

पिता के जीवित रहते पुत्र को तर्पण, पिंडदान या श्राद्ध जैसे पितृकर्म नहीं करने चाहिए। गरुड़ पुराण के अनुसार, पिता ही पूर्वजों तक जल और अन्न पहुंचाने के अधिकारी हैं। पुत्र द्वारा इन कार्यों को करने से पितृऋण बढ़ सकता है और परिवार पर संकट आ सकता है। पिता स्वयं आज्ञा दें, तभी पुत्र इन कामों में सहयोग कर सकता है।

दान में पिता का नाम पहले रखना

किसी भी दान या पुण्य कार्य के संकल्प में पिता का नाम आगे रखना चाहिए। गरुड़ पुराण में कहा गया है कि पिता के नाम से किया गया दान सात पीढ़ियों तक पुत्र के कुल को लाभ पहुंचाता है। पुत्र का नाम पहले रखकर दान करने से पुण्य का पूरा फल नहीं मिलता और पितर नाराज हो सकते हैं।

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सामाजिक आयोजनों में पिता का सम्मान

शादी, उपनयन या किसी भी सामाजिक कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र पर पिता का नाम पुत्र से पहले आना चाहिए। यह सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि पिता के प्रति सम्मान का प्रतीक है। गरुड़ पुराण कहता है कि पिता के रहते पुत्र का नाम पहले लिखना कुल की परंपरा का उल्लंघन है और इससे पिता का अपमान होता है।

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पारंपरिक प्रथाओं में बदलाव ना करना

घर की पूजा पद्धति, कुल देवता की परंपरा या घरेलू रीति-रिवाजों में पिता के जीवित रहते बदलाव नहीं करना चाहिए। गरुड़ पुराण के अनुसार, पिता परिवार की परंपरा के संरक्षक होते हैं। उनकी अनुमति के बिना इनमें फेरबदल करने से घर में अशांति और पितृ दोष लग सकता है।

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पिता के जीवित रहते इन 5 कामों से बचना पुत्र का धर्म है। इससे ना सिर्फ पिता का सम्मान बना रहता है, बल्कि कुल की खुशहाली और पितरों का आशीर्वाद भी बना रहता है। गरुड़ पुराण हमें याद दिलाता है कि पिता की उपस्थिति में विनम्रता और मर्यादा बनाए रखना ही सच्चा पुत्र धर्म है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

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नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


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डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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