Ganga Saptami 2026: भगवान शिव की जटाओं में क्यों समाई मां गंगा? जानिए पौराणिक कथा
गंगा सप्तमी 2026 पर जानिए भगवान शिव की जटाओं में मां गंगा क्यों समाईं। राजा भागीरथ की तपस्या, गंगा के अहंकार और शिव जी की दिव्य लीला की पूरी पौराणिक कथा इस लेख में। गंगा सप्तमी का महत्व, तिथि और पूजा विधि भी जानें।

गंगा सप्तमी हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है, जो वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। साल 2026 में गंगा सप्तमी 23 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की याद की जाती है। गंगा सप्तमी को गंगा जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इस पावन तिथि पर गंगा स्नान, व्रत और पूजा करने का विशेष महत्व है। लेकिन इस पर्व के पीछे की सबसे लोकप्रिय कथा भगवान शिव की जटाओं से जुड़ी हुई है, जिसमें गंगा का वेग कम करने की दिव्य लीला छिपी है।
गंगा सप्तमी 2026 की तिथि और महत्व
गंगा सप्तमी 2026 में 22 अप्रैल की रात 10:50 बजे शुरू होगी और 23 अप्रैल की रात 8:50 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, यह पर्व 23 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन गंगा स्नान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि गंगा सप्तमी पर गंगा में स्नान और दान करने से अक्षय फल मिलता है।
राजा भागीरथ की तपस्या
कथा की शुरुआत इक्ष्वाकु वंश के राजा भागीरथ से शुरू होती है। उनके पूर्वज सगर के 60,000 पुत्रों को कपिल मुनि के श्राप से मुक्ति नहीं मिल रही थी। उनकी मुक्ति के लिए केवल गंगा जल ही एकमात्र उपाय था। भागीरथ ने गंगा को धरती पर लाने के लिए हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने गंगा को धरती पर भेजने की अनुमति दे दी, लेकिन समस्या यह थी कि गंगा का वेग इतना तेज था कि वह पृथ्वी को नष्ट कर सकती थी।
भागीरथ ने ली भगवान शिव की शरण
गंगा को अपने वेग पर थोड़ा अभिमान भी था। उन्हें लगा कि कोई भी उनका वेग सहन नहीं कर पाएगा। भागीरथ ने यह संकट देखकर भगवान शिव की शरण ली। शिव पुराण के अनुसार, जब गंगा पूरे अहंकार के साथ स्वर्ग से नीचे गिरीं, तो भगवान शिव ने अपनी घनी जटाएं फैला दीं। गंगा जैसे ही शिव के शीश पर गिरीं, वे उनकी जटाओं के जाल में पूरी तरह उलझ गईं। कई वर्षों तक गंगा शिव की जटाओं में भटकती रहीं। धरती को प्रलय से बचाने के लिए यह भगवान शिव की लीला थी।
जटाओं से निकली भागीरथी धारा
भागीरथ की बार-बार प्रार्थना पर भगवान शिव ने अपनी जटाओं की एक लट खोली। इसके बाद गंगा की एक पतली धारा धरती पर प्रवाहित हुई, जिसे हम आज भागीरथी के नाम से भी जानते हैं। इस प्रकार शिव जी ने गंगा को धरती पर उतारा। इस वजह से गंगा जी को शिव की जटाओं से निकली हुई माना जाता है।
गंगा सप्तमी पर स्नान-दान
इस पर्व पर गंगा स्नान, दान और पूजा करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। गंगा सप्तमी का त्योहार हमें याद दिलाता है कि सच्ची श्रद्धा और समर्पण से हर संकट का समाधान संभव है।
23 अप्रैल 2026 को गंगा सप्तमी के शुभ अवसर पर गंगा स्नान करें, शिव जी की पूजा करें और इस पौराणिक कथा को याद करके अहंकार त्यागने का संकल्प लें। ऐसा करने से गंगा मां की कृपा से जीवन में शांति और पवित्रता बनी रहेगी।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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