गणेश जी की सूंड दाईं ओर हो या बाईं? गणेश चतुर्थी पर मूर्ति खरीदते वक्त देखें ये 4 चीजें

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इस गणेश चतुर्थी पर गणेश जी की मूर्ति लेकर आने वाले हैं? जानें उनकी सूंड किस ओर होनी शुभ मानी जाती है? साथ ही जानें मूर्ति लेते वक्त और किन चीजों का ध्यान रखना है? 

ganesh ji ki sund kis or honi chahiye
गणेश जी की सूंड किस ओर होनी चाहिए?

गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को है। इसी दिन लोग घरों में बप्पा की मूर्ति को स्थापित करेंगे। हालांकि मार्केट जाकर कई बार स्थिति ऐसी आती है कि समझ ही नहीं आता है कि कौन सी मूर्ति ली जाए? ये सवाल तो जरूर मन में आता है कि गणेश जी की मूर्ति में सूंड किस ओर होनी चाहिए? सूंड किस ओर होनी चाहिए इस बात का खास ध्यान तो जरूर रखना चाहिए। इसके अलावा भी मूर्ति लेते हुए कुछ और भी विशेष चीजों का ध्यान जरूर रखना चाहिए। इन नियमों को जानें और साथ में ये भी जानें कि आखिर दाईं और बाईं सूंड को लेकर क्या धार्मिक महत्व है?

बाईं सूंड वाले गणेश जी होते हैं शुभ

हिंदू धर्म मान्यता के हिसाब से जब घर में स्थापना करनी हो तो बाईं तरफ सूंड वाले गणेश जी शुभ माने जाते हैं। जिस मूर्ति में सूंड बाईं ओर होती है उन्हें वाममुखी गणेश जी कहा जाता है। ऐसी मूर्ति को घर की सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। गृहस्थ जीवन में पूजा के लिए इस मूर्ति को सही माना जाता है। ऐसे में अगर आप पहली बार गणेश चतुर्थी पर मूर्ति ले आ रहे हैं तो इस बात का ख्याल रखें कि उनकी सूंड बाईं ओर हो।

दाईं सूंड वाले गणेश जी से जुड़ा नियम

जिस मूर्ति में गणेश जी की सूंड दाईं ओर होती है उसे उनका सिद्धिविनायक स्वरूप माना जाता है। ऐसी मूर्ति मंदिर में ही देखने को मिलती है क्योंकि इनकी पूजा के लिए विशेष नियम होते हैं और इसी वजह से इन्हें घर में स्थापित करने से बचा जाता है।ेश

गणपति की मूर्ति लेते समय ये 3 बातें ध्यान में रखें-

1. मूर्ति ऐसी खरीदें जिसमें गणेश जी बैठी हुई मुद्रा में हो। इसे बहुत ही शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में स्टेबिलिटी आती है और सुख-समृद्धि बनी रहती है। ऐसे में जब भी गणेश जी की मूर्ति लेने जाएं तो मुद्रा का विशेष रूप से ध्यान रखें।

2. साथ में इस बात का भी ध्यान रखें कि गणेश जी की मूर्ति ऐसी हो कि उनके हाथ में मोदक या फिर लड्डू हो। साथ ही उनके वाहन मूषक भी साथ में हो। माना जाता है कि ऐसी मूर्ति घर में खुशहाली लेकर आती है। गणेश जी के साथ इन दो चीजों का होना शुभ माना जाता है।

3. मार्केट में कई तरह की मूर्तियां मिलती है। आप कोशिश करें कि इको फ्रेंडली मूर्ति ही लें। प्योर मिट्टी की बनी मूर्ति आसानी से विसर्जित हो जाती है और मिट्टी इस दौरान पूरी तरह घुल जाती है। ऐसे में इसका असर पर्यावरण पर भी नहीं पड़ता है। तो ऐसे में मूर्ति जब भी लेने जाएं तो मुद्रा के साथ-साथ सूंड, मोदक-लड्डू वगैहर का ध्यान रखें। पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से घर मूर्ति को ले आएं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

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गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

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