गणेश चतुर्थी 2026: क्यों सबसे पहले पूजे जाते हैं गणपति? जानें मोदक, दूर्वा और विसर्जन का महत्व
गणेश चतुर्थी भगवान गणेश की पूजा और उनके स्वागत का प्रमुख पर्व है। इस दिन घरों और पंडालों में गणपति की स्थापना कर मोदक, दूर्वा और फूल अर्पित किए जाते हैं। जानें गणेश जी को प्रथम पूजनीय क्यों माना जाता है, पूजा में मोदक और दूर्वा का महत्व क्या है?

गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश को समर्पित है। हिंदू धर्म में गणेश जी को प्रथम पूजनीय माना गया है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि गणपति की पूजा करने से कार्य में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। गणेश चतुर्थी के दिन लोग अपने घरों और पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करते हैं। इसके बाद कई दिनों तक पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का दौर चलता है। अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ इस उत्सव का समापन होता है।
गणेश चतुर्थी पर ही क्यों होती है गणपति की स्थापना?
धार्मिक मान्यता के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इसी वजह से इस दिन गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। गणेश जी को बुद्धि, विवेक और शुभता का देवता माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन उनकी प्रतिमा स्थापित कर पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है। गणपति स्थापना के दौरान भक्त भगवान गणेश से परिवार की सुख-शांति, अच्छी सेहत, तरक्की और सभी परेशानियों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं।
गणेश जी को सबसे पहले क्यों पूजा जाता है?
गणेश जी को प्रथम पूजनीय बनाने से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है। कहा जाता है कि एक बार भगवान शिव और माता पार्वती के दोनों पुत्रों गणेश और कार्तिकेय के बीच यह बात सामने आई कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है। तब दोनों के सामने पूरी दुनिया का चक्कर लगाने की शर्त रखी गई। कार्तिकेय अपने वाहन पर बैठकर संसार की परिक्रमा करने निकल गए। गणेश जी का वाहन मूषक था। उन्होंने अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती की तीन परिक्रमा की और कहा कि उनके लिए माता-पिता ही पूरा संसार हैं। गणेश जी के इस उत्तर से भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न हुए। तभी से गणेश जी को सबसे पहले पूजे जाने का वरदान मिला, ऐसी धार्मिक मान्यता है।
पूजा में क्यों चढ़ाए जाते हैं मोदक?
गणेश जी को मोदक बेहद प्रिय माना जाता है। गणेश चतुर्थी की पूजा में मोदक का भोग लगाने की परंपरा है। इसके पीछे भी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। मोदक को ज्ञान और आनंद का प्रतीक माना जाता है। गणपति को मोदक का भोग लगाकर भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। इसके अलावा गणेश जी की पूजा में दूर्वा घास का भी विशेष महत्व माना जाता है। भक्त भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करते हैं और फिर आरती करते हैं।
घर में गणपति की स्थापना करते समय इन बातों का रखें ध्यान
गणेश चतुर्थी पर प्रतिमा स्थापित करते समय कई परिवार शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हैं। प्रतिमा को साफ स्थान पर स्थापित किया जाता है। पूजा की जगह को पहले अच्छी तरह साफ किया जाता है और फिर कलश स्थापना सहित अन्य पूजा विधियां की जाती हैं। भगवान गणेश को लाल फूल, दूर्वा, मोदक और फल अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद गणेश जी की आरती की जाती है। धार्मिक परंपरा में पूजा के दौरान श्रद्धा और स्वच्छता को विशेष महत्व दिया गया है।
विसर्जन के साथ क्यों दी जाती है बप्पा को विदाई?
गणेश चतुर्थी के बाद गणपति विसर्जन का आयोजन किया जाता है। कई घरों में डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन, सात दिन या दस दिन तक गणेश जी की पूजा की जाती है। अनंत चतुर्दशी के दिन बड़े स्तर पर गणपति विसर्जन किया जाता है। विसर्जन के दौरान भक्त गणपति बप्पा से अगले साल फिर आने की प्रार्थना करते हैं। गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन इस भाव के साथ किया जाता है कि बप्पा अपने साथ घर की परेशानियां और नकारात्मकता भी लेकर जाएं। आजकल पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा और प्राकृतिक सामग्री से पूजा करने पर भी जोर दिया जाता है।
गणेश चतुर्थी का असली संदेश क्या है?
गणेश चतुर्थी केवल पूजा और उत्सव का पर्व नहीं है। भगवान गणेश को बुद्धि और विवेक का देवता माना जाता है। उनकी पूजा के पीछे यह संदेश भी देखा जाता है कि किसी भी काम को शुरू करने से पहले सोच-समझकर आगे बढ़ना चाहिए। गणेश जी का स्वरूप भी कई संदेश देता है। उनका बड़ा सिर अधिक सोचने, बड़े कान ध्यान से सुनने और छोटी आंखें एकाग्रता का प्रतीक मानी जाती हैं। इसी वजह से गणपति उत्सव आस्था के साथ जीवन में अच्छे विचार और विवेक अपनाने का संदेश भी देता है।
गणेश चतुर्थी पर घर में बप्पा की स्थापना कर भक्त श्रद्धा के साथ पूजा करते हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में गणपति उत्सव को लेकर खास उत्साह देखने को मिलता है।


