नीले रंग के गणपति की पूजा क्यों नहीं करनी चाहिए? गणेश चतुर्थी से पहले जान लें

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Blue ganesha significance: हिंदू धर्म में गणेश जी प्रथम पूजनीय देवता हैं। किसी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणपति पूजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सामान्य तौर पर नीले रंग के गणपति की पूजा क्यों नहीं की जाती है।

neele rang ke ganesh ji ki puja kyu nahi karni chaiye
नीले रंग के गणपति की पूजा क्यों नहीं करनी चाहिए?

Ganesh chaturthi 2026 Date: हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। मान्यता है कि भगवान गणेश का प्राकट्य भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ था। इसे गणेश जन्मोत्सव के रूप में जाना जाता है। इस पर्व की शुरुआत गणेश चतुर्थी से होती है और 10 दिनों तक चलता है और अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ समाप्त होता है। गणेश चतुर्थी के दिन लोग अपने घरों में भगवान गणेश की मूर्ति या प्रतिमा विराजित करते हैं और उनकी विधि-विधान से पूजा करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सामान्य तौर पर नीले रंग के गणपति की पूजा क्यों नहीं करनी चाहिए।

गणेश चतुर्थी कब है 2026:

हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर 2026, सोमवार को सुबह 07 बजकर 06 मिनट पर होगी। चतुर्थी तिथि का समापन 15 सितंबर को सुबह 07 बजकर 44 मिनट पर होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म चतुर्थी तिथि के मध्याह्न काल में हुआ था। इसलिए यह पर्व 14 सितंबर को मनाना उत्तम माना जा रहा है।

नीले रंग के गणेश जी की पूजा क्यों नहीं करनी चाहिए:

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, पीले या लाल रंग के गणेश जी की मूर्ति घर लाना और उसकी पूजा करना अत्यंत शुभ होता है। भगवान गणेश को गणपति भी कहा जाता है। नीले रंग के गणेश जी विशेष गणपति हैं। इनको उच्छिष्ट गणपति भी कहा जाता है। विशेष परिस्थितियों में उच्छिष्ट गणपति की पूजा होती है। इनकी पूजा सामान्य स्थितियों में करने की मनाही है। पीत वर्ण यानी पीले रंग के गणपति की पूजा करना सबसे अच्छा माना जाता है। कहा जाता है कि जब तक किसी एक्सपर्ट या ज्योतिषी की सलाह नहीं हो या आपको जानकारी नहीं हो तब तक उच्छिष्ट गणपति यानी नीले रंग के भगवान गणेश की पूजा नहीं करनी चाहिए।

नीले रंग के गणपति की पूजा का रहस्य:

नीले रंग या उच्छिष्ट गणपति का स्वरूप तांत्रिक साधनाओं और तंत्र पूजा से जुड़ा माना गया है। तंत्र विद्या और साधना के अत्यंत कठोर नियम होते हैं। इन्हें आम गृहस्थ जीवन या सामान्य पूजा में नहीं अपनाया जा सकता है। कहा जाता है कि बिना किसी गुरु के मार्गदर्शन में गलत तरीके से पूजा करने का विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

गणेश चतुर्थी पर गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त:

गणेश पूजन और गणेश स्थापना के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त मध्याह्न काल माना जाता है। 14 सितंबर को गणेश पूजन और स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 मिनट से दोपहर 01:31 बजे तक रहेगा।

चतुर्थी के दिन गणेश पूजन में किन बातों का रखें ध्यान:

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा के समय पीले, लाल या सफेद रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। महिलाओं को पूजा में पीले, गुलाबी या लाल रंग के वस्त्र पहनना उत्तम माना जाता है। इस दिन काले रंग के कपड़े नहीं पहनना चाहिए। अगर आप भगवान गणेश की मूर्ति को घर पर स्थापित करना चाहते हैं तो मध्यम आकार की मूर्ति लाएं, बहुत बड़ी प्रतिमा घर पर स्थापित नहीं करनी चाहिए। स्वयं शुद्ध मिट्टी से घर पर मूर्ति बनाकर पूजन करने का फल सर्वश्रेष्ठ होता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Saumya Tiwari

लेखक के बारे में

Saumya Tiwari

संक्षिप्त विवरण

सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।


विस्तृत बायो


परिचय और अनुभव

सौम्या तिवारी की ग्रह राशि परिवर्तन, व्रत-त्योहार, सामुद्रिक शास्त्र, अंकज्योतिष, वास्तु शास्त्र एवं फेंगशुई, कथा-कहानी जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है। उन्हें ज्योतिष एवं धार्मिक विषयों में करीब 6 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं और धर्म व ज्योतिष (एस्ट्रोलॉजी) सेक्शन का हिस्सा हैं।


इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।


इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।


व्यक्तिगत रुचियां

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।


विशेषज्ञता

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