गणेश चतुर्थी पर बप्पा को दूर्वा चढ़ाते समय ना करें ये गलती, जानें सही नियम

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

गणेश जी को दूर्वा चढ़ाते समय कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती? जानें गणेश चतुर्थी पर बप्पा को प्रसन्न करने के लिए दूर्वा अर्पित करने के क्या हैं सही नियम और तरीका।

Ganesh Chaturthi Durva Niyam
गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने के नियम

हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश की आराधना के प्रमुख पर्व के तौर पर मनाया जाता है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होने वाला गणेश उत्सव अनंत चतुर्दशी तक चलता है। इस दौरान घरों और पूजा पंडालों में गणपति की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि गणेश जी की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार के दिन मनाई जाएगी। गणपति पूजन में दूर्वा अर्पित करने की परंपरा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश को दूर्वा प्रिय है और श्रद्धापूर्वक 108 दूर्वा अर्पित करने से बप्पा की कृपा प्राप्त होती है। ऐसे में दूर्वा चढ़ाने की सही विधि और इससे जुड़े नियमों को जानना जरूरी है।

दूर्वा चढ़ाते समय सबसे पहले रखें शुद्धता का ध्यान

भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करते समय उसकी शुद्धता और ताजगी का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा के लिए हरी और ताजी दूर्वा ही लेना उचित माना जाता है। सूखी, मुरझाई या गंदी दूर्वा को पूजा में गलती से भी इस्तेमाल ना करें। दूर्वा को गणेश जी को अर्पित करने से पहले साफ पानी से धो लें। भक्त चाहें तो 108 अलग-अलग दूर्वा अर्पित कर सकते हैं। इसके अलावा 21-21 दूर्वा की पांच गांठें बनाकर 3 अतिरिक्त दूर्वा के साथ संख्या पूरी की जा सकती है। दूर्वा को भगवान की प्रतिमा पर फेंकने के बजाय सम्मानपूर्वक अर्पित करना चाहिए।

पूजा की थाली में इन सामग्री को करें शामिल

गणेश चतुर्थी की पूजा के लिए सामग्री पहले से तैयार कर लेना बेहतर रहता है। अभिषेक के लिए पंचामृत, गंगाजल या शुद्ध जल चाहिए। इसके साथ चंदन, रोली, अक्षत और ताजे फूल पूजा में शामिल करें। धूप और देसी घी का दीपक भी पूजन सामग्री का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भगवान गणेश को भोग में मोदक, लड्डू या गुड़ अर्पित किया जा सकता है। बता दें कि सभी सामग्री व्यवस्थित रखने से पूजा के बीच अनावश्यक भागदौड़ नहीं करनी पड़ती है। पूजा पूरी होने के बाद विधिपूर्वक आरती करें और भगवान को भोग लगाएं। इसके बाद परिवार के सदस्यों के साथ प्रसाद ग्रहण करें और अन्य लोगों में भी प्रसाद का वितरण करें।

घर में सबकुछ सही फिर भी नहीं मिल रही तरक्की? जानिए नैऋत्य कोण से जुड़े नियम

इस विधि से अर्पित करें 108 दूर्वा

गणेश चतुर्थी की सुबह स्नान के बाद पूजा स्थान की सफाई कर लें। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य देकर गणपति पूजन की तैयारी करें। भगवान गणेश की प्रतिमा को साफ पात्र में स्थापित कर पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद शुद्ध जल या गंगाजल से अभिषेक करें। प्रतिमा को साफ कपड़े से पोंछकर भगवान को वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद चंदन, रोली और अक्षत चढ़ाएं। अब पहले से साफ करके रखी गई दूर्वा को भगवान गणेश को अर्पित करें। दूर्वा को गणेश जी के मस्तक, सूंड या चरणों के पास रखना उचित माना जाता है। इस दौरान गणपति मंत्र का जाप करते हुए पूजा करने से माहौल भक्तिमय बना रहता है।

देर से ही सही, बड़ा मुकाम पाते हैं इन तारीखों में जन्मे लोग, इनकी मेहनत नहीं जाती बेकार

दूर्वा के साथ भूलकर भी ना करें लापरवाही

गणेश जी को दूर्वा चढ़ाते समय सबसे जरूरी बात यह है कि पूजा सामग्री के साथ किसी तरह की लापरवाही ना हो। दूर्वा को जमीन पर रखने, गंदे हाथों से उठाने या बिना साफ किए सीधे भगवान को अर्पित करने से बचना चाहिए। इसी तरह मुरझाई या अशुद्ध दूर्वा का इस्तेमाल भी उचित नहीं माना जाता है। अगर 108 दूर्वा अर्पित करने का संकल्प लिया है, तो उन्हें पहले ही गिनकर व्यवस्थित कर लें। दूर्वा चढ़ाते समय जल्दबाजी के बजाय पूजा पर ध्यान केंद्रित करें।

नीम करोली बाबा के 4 सूत्र, जो जीवन को दे सकते हैं नई दिशा

विधिपूर्वक पूजा से बरसेगी बप्पा की कृपा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने और उन्हें प्रिय दूर्वा अर्पित करने से बप्पा प्रसन्न होते हैं। गणपति को विघ्नहर्ता कहा जाता है और उनकी आराधना को जीवन की बाधाओं से मुक्ति की कामना से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि गणेश जी की कृपा से रुके हुए कार्यों में गति आती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर विधि-विधान से 108 दूर्वा से अभिषेक करने पर भगवान गणेश अपने भक्तों के जीवन से सभी नकारात्मक शक्तियों को दूर कर देते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

लेखक के बारे में

Navaneet Rathaur

संक्षिप्त विवरण

नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


विस्तृत बायो परिचय और अनुभव

डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


विशेषज्ञता (Areas of Expertise)

अंक ज्योतिष
हस्तरेखा विज्ञान
वास्तु शास्त्र
वैदिक ज्योतिष

और पढ़ें
जानें Navratri 2026, Rashifal और Panchang की सटीक जानकारी। रोजाना पूजा-पाठ के लिए पढ़ें Shiv Chalisa, Shiv Aarti, Shiv Mahamrityunjaya Mantra, Shiv Stuti, Hanuman Chalisa और Bajrang Baan।
Hindi Newsधर्म न्यूज़गणेश चतुर्थी पर बप्पा को दूर्वा चढ़ाते समय ना करें ये गलती, जानें सही नियम