गणेश चतुर्थी 2026: सुबह 11:02 से दोपहर 1:31 तक बप्पा की स्थापना का शुभ मुहूर्त, निकल गया तो कब करें गणेश स्थापना?

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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गणेश चतुर्थी 2026 पर गणपति स्थापना के लिए सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक रहेगा। अगर यह समय छूट जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है- दोपहर 3:20 से 4:52 बजे (लाभ) और 4:52 से 6:24 बजे (अमृत चौघड़िया) में भी बप्पा की स्थापना की जा सकती है।

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Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी का त्योहार आज यानी 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाया जा रहा है। गणपति भक्तों के लिए आज का दिन खास है। घरों और मंदिरों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाएगी। अगर आप भी आज बप्पा को घर लाने की तैयारी कर रहे हैं तो स्थापना के समय का ध्यान रखना जरूरी है। पंचांग के अनुसार गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा और स्थापना के लिए सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक का समय शुभ है। इस दौरान गणपति की स्थापना करके विधि-विधान से पूजा की जा सकती है। यह करीब 2 घंटे 29 मिनट का समय है। लेकिन अगर किसी कारण से यह समय निकल जाए तो क्या बप्पा की स्थापना नहीं की जा सकती? क्या फिर अगले शुभ समय का इंतजार करना चाहिए? और क्या राहुकाल में गणपति स्थापना की जा सकती है?

पहले जानें चतुर्थी तिथि कब से कब तक है

पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे चतुर्थी तिथि शुरू होगी। यह तिथि 15 सितंबर की सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। चूंकि 14 सितंबर को मध्याह्न काल में चतुर्थी तिथि मौजूद है, इसलिए इसी दिन गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है। यानी सुबह 7 बजे के आसपास तिथि बदलने के बाद गणपति स्थापना के लिए मध्याह्न का खास समय मिलता है।

बप्पा की स्थापना का मुख्य शुभ मुहूर्त

दिल्ली में गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक है। गणेश पूजा के लिए इसी समय को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था। इसलिए गणेश चतुर्थी पर भी मध्याह्न के समय पूजा और स्थापना को प्राथमिकता दी जाती है।

अभिजीत मुहूर्त भी इसी बीच

14 सितंबर को दिन में अभिजीत मुहूर्त करीब 11:51 बजे से 12:41 बजे तक रहेगा। खास बात यह है कि यह समय गणेश पूजा के मुख्य मध्याह्न मुहूर्त के अंदर ही आता है। इसलिए अगर कोई श्रद्धालु गणपति स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त को प्राथमिकता देना चाहता है तो 11:51 से 12:41 बजे के बीच का समय भी महत्वपूर्ण है।

राहुकाल कब है?

सोमवार 14 सितंबर को दिल्ली में राहुकाल सुबह 7:38 बजे से 9:10 बजे तक रहेगा। सामान्य धार्मिक मान्यता में राहुकाल के दौरान शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि ध्यान देने वाली बात यह है कि गणपति स्थापना का मुख्य मुहूर्त 11:02 बजे से शुरू हो रहा है, यानी मुख्य स्थापना मुहूर्त राहुकाल के बाद है। इसलिए राहुकाल के कारण गणपति स्थापना के मुख्य समय पर कोई असर नहीं पड़ता।

गणेश चतुर्थी पर शुभ मुहूर्त निकल गया तो क्या करें? इन समयों में कर सकते हैं बप्पा की स्थापना

गणेश चतुर्थी पर बप्पा की स्थापना के लिए सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक का समय सबसे खास माना गया है। अगर किसी वजह से इस दौरान गणपति की स्थापना नहीं हो पाई तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। दोपहर बाद भी शुभ समय मिल रहा है। दोपहर 3:20 बजे से 4:52 बजे तक लाभ चौघड़िया रहेगा। इसके बाद शाम 4:52 बजे से 6:24 बजे तक अमृत चौघड़िया रहेगा। ऐसे में मुख्य मुहूर्त छूट जाने पर इन दोनों समय में गणपति बप्पा की स्थापना की जा सकती है। वहीं दोपहर 1:31 बजे से 3:20 बजे तक स्थापना करने से बचना बेहतर रहेगा। यानी अगर सुबह का मुख्य मुहूर्त निकल गया है तो सीधे दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:24 बजे के बीच बप्पा की स्थापना का विकल्प रखा जा सकता है।

क्या राहुकाल में गणपति स्थापना कर सकते हैं?

राहुकाल के दौरान गणपति स्थापना न करना ही बेहतर माना जाता है। 14 सितंबर को दिल्ली में राहुकाल सुबह 7:38 से 9:10 बजे तक है। इसलिए इस अवधि को छोड़कर ही स्थापना की तैयारी करें। अगर सुबह का समय निकल गया है तो मुख्य गणेश स्थापना के लिए 11:02 बजे से शुरू होने वाले मध्याह्न मुहूर्त को प्राथमिकता दी जा सकती है।

दिन के बाकी प्रमुख मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: करीब 4:29 से 5:17 बजे तक।

सूर्योदय: करीब 6:05 बजे।

राहुकाल: सुबह 7:38 से 9:10 बजे तक।

यमगंड: सुबह 10:43 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक।

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक।

गुलिक काल: दोपहर 1:49 से 3:22 बजे तक।

विजय मुहूर्त: करीब 2:20 से 3:08 बजे तक।

गोधूलि मुहूर्त: शाम करीब 6:28 से 6:53 बजे तक।

लेकिन गणपति स्थापना के लिए कौन सा समय सबसे जरूरी?

अगर पूरे दिन के इतने सारे मुहूर्त देखकर आप उलझ रहे हैं तो सबसे जरूरी समय सिर्फ एक है- गणेश चतुर्थी का मध्याह्न पूजा मुहूर्त। यह समय है 11:02 AM से 1:31 PM तक। गणपति स्थापना और मुख्य पूजा के लिए इसी अवधि को प्राथमिकता दें।

गणपति स्थापना की तैयारी कब शुरू करें?

स्थापना का मुहूर्त शुरू होने का इंतजार करते हुए पूजा की तैयारी शुरू करने से बचने की जरूरत नहीं है। पूजा स्थल की सफाई, चौकी तैयार करना, कलश और पूजा सामग्री रखना और गणेश जी की प्रतिमा को तैयार रखना पहले से किया जा सकता है। मुहूर्त शुरू होने पर प्रतिमा की स्थापना और मुख्य पूजा के संकल्प से पूजा शुरू की जा सकती है।

गणेश जी की पूजा में क्या-क्या चढ़ाएं?

गणपति पूजा के लिए दूर्वा, लाल फूल, चंदन, रोली, अक्षत, धूप, दीप, फल और मिठाई रखी जाती है। भगवान गणेश को मोदक या लड्डू का भोग लगाया जाता है। पूजा में कलश, नारियल, सुपारी, मौली और पंचामृत भी रखा जा सकता है। परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री में कुछ बदलाव हो सकता है।

बप्पा की स्थापना के बाद कैसे करें पूजा?

गणेश जी की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करने के बाद उनका आवाहन करें। इसके बाद जल, पंचामृत, चंदन, रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें। दूर्वा चढ़ाएं और मोदक का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें। “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप किया जा सकता है। इसके बाद गणेश जी की आरती करें।

आज चंद्रमा देखने से भी बचना है

गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन को लेकर भी विशेष धार्मिक मान्यता है। पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को सुबह 9:06 बजे से रात 8:04 बजे तक चंद्र दर्शन से बचने का समय बताया गया है। मान्यता है कि गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखने से मिथ्या कलंक लग सकता है। इसी वजह से इस दिन चंद्र दर्शन न करने की परंपरा है।

इस बार तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन

14 सितंबर का दिन एक और वजह से खास है। इसी दिन हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों पर्व हैं। हरतालिका तीज की तृतीया तिथि सुबह करीब 7:06 बजे तक है और इसके बाद चतुर्थी शुरू हो जाती है। ऐसे में जिन घरों में दोनों पर्व मनाए जा रहे हैं, वहां सुबह हरतालिका तीज की पूजा के बाद गणपति स्थापना की तैयारी की जा सकती है। गणेश पूजा का मुख्य समय दोपहर में है, इसलिए दोनों पूजा के लिए अलग-अलग समय रखा जा सकता है।

- गणेश चतुर्थी: 14 सितंबर 2026

- चतुर्थी तिथि शुरू: सुबह 7:06 बजे

- चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 सितंबर सुबह 7:44 बजे

- गणेश स्थापना/पूजा का मुख्य मुहूर्त: सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक

- अभिजीत मुहूर्त: 11:51 बजे से 12:41 बजे तक

- राहुकाल: 7:38 बजे से 9:10 बजे तक

- यमगंड: 10:43 बजे से 12:16 बजे तक

- गुलिक काल: 1:49 बजे से 3:22 बजे तक

- विजय मुहूर्त: करीब 2:20 से 3:08 बजे तक

- गोधूलि मुहूर्त: करीब 6:28 से 6:53 बजे तक

- चंद्र दर्शन से बचने का समय: करीब 9:06 AM से 8:04 PM

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


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करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
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