
Ganadhipa Sankashti Chaturthi : गणाधिप संकष्टी व्रत कल, नोट कर लें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, उपाय
हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। नवंबर महीने में आने वाली इस चतुर्थी को गणाधिप संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान श्री गणेश को गणाधिप यानी गणों के अधिपति के रूप में पूजा जाता है।
Ganadhipa Sankashti Chaturthi Vrat : हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को गणाधिप संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान श्री गणेश को “गणाधिप” यानी गणों के अधिपति के रूप में पूजा जाता है। यह व्रत खास तौर पर माताओं द्वारा संतान की प्राप्ति, उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन गणेश जी की विधिवत पूजा और चंद्रमा के दर्शन से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और घर में खुशहाली आती है। इस साल गणाधिप संकष्टी चतुर्थी 8 नवंबर 2025, शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन भक्तगण उपवास रखकर गणेश जी का जलाभिषेक करते हैं। मोदक या तिल के लड्डू का भोग लगाते हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करते हैं। ऐसा करने से विघ्नहर्ता गणेश जी की कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

शुभ मुहूर्त और चांद निकलने का समय-
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - नवम्बर 08, 2025 को 07:32 ए एम बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - नवम्बर 09, 2025 को 04:25 ए एम बजे
संकष्टी के दिन चन्द्रोदय - 07:59 पी एम
पूजा-विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
घर में भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
गणेश जी का जलाभिषेक करें और पीला चंदन लगाएं।
फूल, फल, दूर्वा और मोदक का भोग लगाएं।
‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें और गणाधिप संकष्टी की कथा पढ़ें।
पूरे दिन व्रत रखें और शाम को चंद्रमा के उदय का इंतजार करें।
चंद्रमा निकलने के बाद जल से अर्घ्य दें और व्रत का पारण करें।
पारण के बाद सात्विक भोजन या फलाहार करें।
अंत में गणेश जी से क्षमा प्रार्थना करें।
उपाय
व्रत के दिन गणेश चालीसा या संकटमोचन गणेश स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है।
यदि संतान की प्राप्ति की इच्छा हो तो गणेश जी को दूर्वा चढ़ाते हुए “संतानप्राप्त्यर्थं नमः” कहकर प्रार्थना करें।
आर्थिक बाधाओं से छुटकारा पाने के लिए गणेश जी को गुड़ और चने का भोग लगाएं।
शाम को घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना भी शुभ फल देता है।
व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के दिन उपवास और पूजा करने से जीवन की कठिनाइयां कम होती हैं और मनुष्य के सभी कार्य सिद्ध होते हैं। इस दिन की गई साधना से विघ्नहर्ता गणेश जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं। कहा जाता है कि इस व्रत से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।





