फाल्गुन अमावस्या पर करें ये काम, पूर्वज होंगे प्रसन्न, दूर होगा पितृ दोष

Feb 12, 2026 07:05 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का खास महत्व होता है। अमावस्या तिथि हर महीने आती है। इस तरह से सालभर में कुल 12 अमावस्या आती है। फाल्गुन मास चल रहा है। इस साल फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी 2026, मंगलवार को पड़ रही है। मंगलवार को पड़ने के कारण यह भौमवती और दर्श अमावस्या के नाम से भी जानी जाएगी।

फाल्गुन अमावस्या पर करें ये काम, पूर्वज होंगे प्रसन्न, दूर होगा पितृ दोष

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का खास महत्व होता है। अमावस्या तिथि हर महीने आती है। इस तरह से सालभर में कुल 12 अमावस्या आती है। फाल्गुन मास चल रहा है। इस साल फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी 2026, मंगलवार को पड़ रही है। मंगलवार को पड़ने के कारण यह भौमवती और दर्श अमावस्या के नाम से भी जानी जाएगी। हालांकि इसी दिन साल का पहला सूर्य ग्रहण भी लग रहा है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य, पितरों का तर्पण और पिंडदान करने का विधान है। मान्यता है कि अमावस्या के दिन किए गए कुछ कार्य से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और साथ ही पितृदोष भी खत्म होता है। चलिए जानते हैं कि फाल्गुन अमावस्या के दिन कौन-कौन से कार्य करना शुभ होता है।

गंगा में स्नान
मान्यता है कि फाल्गुन अमावास्य के दिन पवित्र नदियों, विशेषकर गंगा में स्नान करने से अनजाने में हुए पापों का नाश होता है। जो लोग नदी तट पर नहीं जा सकते, वे घर पर ही पानी में थोड़ा गंगाजल डालकर स्नान कर सकते हैं। इससे जीवन से जुड़े कष्ट दूर होते हैं।

पितृ तर्पण
अगर आप फाल्गुन अमावस्या पर पितरों को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करना शुभ रहता है। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और जीवन में खुशहाली आती है। इस दिन कई धार्मिक और आध्यात्मिक क्रियाएं की जाती हैं।

इस दिन दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के नाम से जल अर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और परिवार को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके अलावा काले तिल की सहायता से पितरों को जल अर्पित करें। इससे भी पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।

पीपल की पूजा
इसके अलावा अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की जड़ में कच्चा दूध और जल अर्पित करें। शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इससे पितृ दोष और शनि दोष शांत होते हैं। साथ ही अमावस्या की रात को दीप जलाना विशेष फलदायक होता है। यह अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का प्रतीक है और जीवन में सकारात्मकता लाता है।

क्या करें दान
फाल्गुन अमावस्या के दिन दान करने से कई गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इससे ना सिर्फ देवतागण प्रसन्न होते हैं, बल्कि पितरों को भी खुशी मिलती है। इस दिन आप तिल, अन्न और वस्त्र का दान करें। जरूरतमंदों को भोजन कराएं। इसके अलावा पितरों के नाम से दान करें।

हनुमान चालीसा का पाठ करें
चूंकि फाल्गुन अमावस्या के दिन मंगलवार है, इसलिए हनुमान चालीसा का पाठ करें और हनुमान जी को चमेली के तेल का दीपक व सिंदूर अर्पित करें। इससे भी जीवन के सारे कष्ट मिट जाते हैं।

क्या ना करें
फाल्गुन अमावस्या का दिन विशेष रूप से तामसिक दोषों से मुक्ति पाने का अवसर है। अगर आप इस दिन पूजा और उपाय सही तरीके से करते हैं, तो यह आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आता है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
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