Ekadashi kab hai: वरुथिनी एकादशी व्रत में दशमी को 10, एकादशी को 11, द्वादशी को इन 12 कामों को त्याग दें, तभी सफल है व्रत
Ekadashi kab hai:वरुथिनी एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी है। यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर है। इस दिन व्रत और पूजा करने से मनुष्य के जीवन से नकारात्मकता दूर होती है,

वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल को मनाई जाएगी। आपको बता दें कि आषाढ़ मास के यह एकादशी बहुत खास मानी जाती है। ऐसा कहा जाता है कि जो इस व्रत को रख लेता है, उसको 10000 कन्याओं के कन्यादान का फल मिलता है। आपको बता दें कि जो वरुथिनी एकादशी का व्रत कर मधुसूदनका पूजन करते हैं, वे सब पापोंसे मुक्त हो परमगति को पाते हैं। आजकल युवाओं में भी एकादशी के व्रत का क्रेज बढ़ रहा है। वे इस दिन व्रत कर भजवन क्लबिंग करते हैं। आपको बता दें कि एकादशी व्रत के कुछ नियम हैं। तीन दिनों तक इस व्रत के नियम मायने रखते हैं। पद्मपुराण और स्कंदपुराण में इन नियमों को अच्छे से समझाया गया है।
वरुथिनी एकादशी से पहले दशमी, एकादशी और द्वादशी को किन नियमों का पालन करना चाहिए
आपको बता दें कि वरुथिनी एकादशी व्रत रखने से सुख-समृद्धि, सौभाग्य और मानसिक शांति मिलती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत करने से पापों से मुक्ति तो मिलती है और जीवन में सुख आता है। अगर आप इस व्रत को करते हैं, तो वैष्णव पुरुष दशमी तिथि को कांस, उड़द, मसूर, चना, शाक, मधु, दूसरे का अन्न, दो बार भोजन, मैथुन, इन दस बातों, कामों का परित्याग कर दें। वहीं एकादशी के दिन जुआ खेलना, नींद लेना, पान खाना, दांतुन करना, दूसरेकी निन्दा करना, चुगली खाना, चोरी, हिंसा, मैथुन, क्रोध, असत्य-बोलना-इन 11 बातों को त्याग दें। इसके अलावा द्वादशी को कांसे, उड़द, शराब, मधु, तेल, पापियों से वार्तालाप, व्यायाम, परदेश गमन, दो बार भोजन, मैथुन, बैल की पीठ पर सवारी और मसूर-इन 12 चीजों का त्याग करें।
क्या है इस एकादशी व्रत का महत्व
वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वरुथिनी एकादशी भगवान विष्णु की आराधना का अत्यंत शुभ और फलदायी दिन माना जाता है। वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से पापों का क्षय होता है और सौभाग्य की वृद्धि होती है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी है, जो परिवार के कल्याण, आर्थिक उन्नति और जीवन में शुभ फल की कामना करते हैं। घरों और मंदिरों में भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के समक्ष दीप, धूप, पुष्प, तुलसीदल, फल और नैवेद्य अर्पित कर पूजा-अर्चना की जाएगी। कई श्रद्धालु दिनभर निराहार या फलाहार व्रत रखकर भजन-कीर्तन, विष्णु सहस्रनाम और एकादशी व्रत कथा का पाठ करेंगे।
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Anuradha Pandeyशार्ट बायो
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