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दिसंबर में कब-कब रखा जाएगा एकादशी व्रत, जानें डेट व पूजा विधि

दिसंबर में कब-कब रखा जाएगा एकादशी व्रत, जानें डेट व पूजा विधि

संक्षेप:

EkaDashi Kab hai EkaDashi in December 2025: एकादशी तिथि के दिन विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और उपवास किया जाता है। इस साल दिसंबर में 3 एकादशी पड़ रही हैं। आइए जानते हैं दिसंबर की एकादशी की डेट और पूजा विधि-

Nov 22, 2025 12:04 pm ISTShrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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EkaDashi Kab hai EkaDashi in December 2025:एकादशी तिथि सनातन धर्म में काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। एकादशी तिथि के दिन विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और उपवास किया जाता है। हर महीने के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी पर व्रत रखा जाता है। पंचांग के अनुसार, दिसंबर के महीने में मार्गशीर्ष मास की शुक्ल एकादशी और पौष मास की कृष्ण व शुक्ल एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस साल दिसंबर में 3 एकादशी पड़ रही हैं। आइए जानते हैं दिसंबर महीने की एकादशी की डेट और पूजा की विधि-

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दिसंबर में कब-कब रखा जाएगा एकादशी व्रत, जानें डेट व पूजा विधि

पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 30 नवंबर को 09:29 पी एम पर होगी और समापन 1 दिसंबर की शाम में 07:01 पी एम पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, 1 दिसंबर के दिन मोक्षदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

14 दिसंबर को पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 14 दिसंबर को शाम में 06:49 पी एम पर होगी। तिथि का समापन 15 दिसंबर की रात में 09:19 पी एम पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, 15 दिसंबर के दिन सफला एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

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30 दिसंबर को पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 30 दिसंबर को सुबह में 07:50 ए एम पर होगी। तिथि का समापन 31 दिसंबर की रात में 05:00 ए एम, पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, 30 दिसंबर के दिन पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

एकादशी व्रत की पूजा-विधि

  • स्नान आदि कर मंदिर की साफ सफाई करें
  • भगवान श्री हरि विष्णु का जलाभिषेक करें
  • प्रभु का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें
  • अब प्रभु को पीला चंदन और पीले पुष्प अर्पित करें
  • मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें
  • संभव हो तो व्रत रखें और व्रत लेने का संकल्प करें
  • एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें
  • पूरी श्रद्धा के साथ भगवान श्री हरि विष्णु और लक्ष्मी जी की आरती करें
  • प्रभु को तुलसी दल सहित भोग लगाएं
  • अंत में क्षमा प्रार्थना करें

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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Shrishti Chaubey

लेखक के बारे में

Shrishti Chaubey
लाइव हिन्दुस्तान में बतौर कॉन्टेंट प्रोड्यूसर काम कर रही सृष्टि चौबे को पत्रकारिता में 2 साल से ज्यादा का अनुभव है। सृष्टि को एस्ट्रोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखने की अच्छी समझ है। इसके अलावा वे एंटरटेनमेंट और हेल्थ बीट पर भी काम कर चुकी हैं। सृष्टि ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, हस्तरेखा, फेंगशुई और वास्तु पर अच्छी जानकारी रखती हैं। खबर लिखने के साथ-साथ इन्हें वीडियो कॉन्टेंट और रिपोर्टिंग में भी काफी रुचि है। सृष्टि ने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। अपने कॉलेज के दिनों में इन्होंने डाटा स्टोरी भी लिखी है। साथ ही फैक्ट चेकिंग की अच्छी समझ रखती हैं। और पढ़ें
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