Ekadashi kab hai: आमलकी एकादशी कब है, जानें इस दिन विष्णु भगवान के साथ शिवजी की भी होती है पूजा
ekadashi kab hai Amalaki Ekadashi date:फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष एकादशी को रंगभरी या आमलकी एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी का बहुत अधिक महत्व है, क्योंकि इसमें भगवानविष्णु के साथ भगवान शिव की भी पूजा की जाती है।

फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष एकादशी को रंगभरी या आमलकी एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी का बहुत अधिक महत्व है, क्योंकि इसमें भगवानविष्णु के साथ भगवान शिव की भी पूजा की जाती है। दोनों की पूजा का सौभाग्य इस एकादशी में मिलता है। इस एकादशी को रंगभरी एकादशी इसलिए कहते हैं,क्योंकि इस दिन शिव गौना कराकर गौरा मां को पहली बार ससुराल के तौर पर काशी में लाए थे। वहां उनका स्वागत किया गया और उन पर गुलाल लगाया । तभी से बनारस में रंगभरी एकादशी बनाई जाती है। इस दिन श्री हरि यानि भगवान विष्णु, शंकर और मां पार्वती का व्रत रख पूजन करने का विधान है। इस साल रंगभरी एकादशी 27 फरवरी यानी कल शुक्रवार को मनाई जाएगी।
उदयातिथि में कब है एकादशी तिथि
पुराणों में एकादशी तिथि उस दिन श्रेष्ठ मानी जाती है, जिस दिन उसमें द्वादशी लग रही हो या फिर त्रयोदशी भी लग रही हो। लेकिन दशमी वाली एकादशी नहीं रखी जाती है। ऐसा कहा जाता है कि दशमी वाली एकादशी से वंश का नाश होता है, इस हिसाब से 27 फरवरी एकादशी उत्तम है, क्योंकि इसमें द्वादशी का संयोग भी मिल रहा है और उदयातिथि भी। इस साल द्रिक पंचांग के अनुसार,फाल्गुन, शुक्ल एकादशी तिथि 26 फरवरी को रात 8 बजकर 03 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 27 फरवरी को शाम 6 बजकर 2 मिनट तक रहेगी।
इस दिन कैसे करें भगवान शिव और विष्णु जी की पूजा
इस सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनकर पहले जल लेकर व्रत का संकल्प लें। फिर एक पटा बिछाकर उसमें शालिग्राम को शंख से स्नान कराएं और चंदन तुलसी, फल -फूल अर्पित करें। भगवान विष्णु की उपासना कर आंवला वृक्ष का पूजन कर कथा सुनने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। श्री हरि विष्णु को खीर बनाकर उसमें तुलसी पत्र डालकर भोग लगाएं तथा पील रंग के फूल की माला चढ़ाना चाहिए। कार्यक्षेत्र में प्रगति के लिए आंवला पेड़ की जड़ से मिट्टी निकालकर तिलक लगाएं। इस दिन शिवलिंग पर गुलाल अर्पित करना चाहिए। शिवलिंग पर लाल रंग का गुलाल तथा मां पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री चढ़ाकर पूजन करना चाहिए। इसके अलावा तुलसी पर नारियल, चुनरी चढ़ाकर पूजन करें, तुलसी की आरती के साथ तुलसी चालीसा के पाठ करने से दांम्पत्य जीवन में मुधरता आती है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

लेखक के बारे में
Anuradha Pandeyशार्ट बायो
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