निर्जला एकादशी पर जलधेनु, घृत धेनु का दान के साथ और क्या दान करना चाहिए?

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इस साल निर्जला एकादशी जून में हैं। निर्जला एकादशी को सबसे बड़ी एकादशी कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस जो दान कर किया जाता है। 

निर्जला एकादशी पर जलधेनु, घृत धेनु का दान के साथ और क्या दान करना चाहिए?

निर्जला एकादशी बहुत बड़ी एकादशी है। अगर पूरे साल की एकादशी का व्रत नहीं रख पाते हैं, तो सिर्फ एक एकादशी का व्रत कर लें। इससे आपको सभी एकादशी का लाभ मिल जाता है। इस दिन व्रत रखें और भगवान विष्णु जी के लिए पहले व्रत का संकल्प लें। निर्जला एकादशी के दिन निर्जल व्रत रखते हैं।इसके लिए पहले संकल्प लें कि मैं भगवान् केशव की प्रसन्नतां के लिए एकादशी को निराहार रहकर आचमन के सिवा दूसरे जल का भी त्याग करूंगा। इसका अर्थ है कि सिर्फ आचमन का जल सुबह लूंगा, इसके बाद नहीं लूंगा और फिर द्वादशी को भगवान्‌ विष्णु का पूजन करना चाहिए। इस साल निर्जला एकादशी ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी 25 जून को मनाई जाएगी। यहां हम बात करेंगे कि एकादशी के दिन किन दानों के बारे में बताया गया है। यहां आप पढ़ सकते हैं।

इस दिन दान का बड़ा महत्व

निर्जला एकादशी के दिन व्रत का बड़ा महत्व हैष ऐसा कहा जाता है कि जो इस व्रत को रख लेता है श्रीहरि का प्रिय होता है, क्योंकि व्रतों में श्रीहरि को निर्जला एकादशी का व्रत बहुत प्रिय है। लेकिन गर्मी में निर्जल रहकर व्रत करना कठिन है। इस दिन व्रत करें और शाम को श्रीहरि का जारण करें। इस दिन दान का भी बहुत अधित महत्व है। पद्मपुराण में इस दिन जलमयी धेनु दान और घृतमयी धेनु दान बताया गया है।

इस दिन श्रीहरि दो जल में शयन करते हैं, ऐसे भगवान्‌ विष्णु का पूजन कर उन्हें जलमयी धेनुका दान करना चाहिए, इसका मलतब है कि या तो धेनु दान या गौदान करें, या फिर गाय के बराबर जल या घी का दान करें। इस दिन जितना हो सके, लोगों को जल दें। पर्याप्त दक्षिणा और अलग-अलग चीजों से ब्राह्मणोंको संतुष्ट करना चाहिए। ऐसा करने पर श्रीहरि मोक्ष प्रदान करते हैं। जिन्होंने ऐसे दान करते हुए श्रीहरिकी पूजा और रात्रि में जागरण करते हुए इस निर्जला एकादशीका ब्रत किया है, उन्होंने अपने साथ ही बीती हुई सो पीढ़ियों की और आनेवाली सो पीढ़ियोंको भगवान्‌ वासुदेवके परम धाम में पहुंचा दिया है।

और किन चीजों का दान उत्तम है

अन्न, वस्त्र, गो, जल, शय्या, सुन्दर आसन, कमण्डलु तथा छाता दान करने चाहिए। इस दिन जूता दान करता है, वह भी श्रीहरि की कृपा पाता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey

शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय और अनुभव

अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


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