Hindi Newsधर्म न्यूज़Eid ul Adha 2024: Date, history, significance and celebration of Bakrid or Bakreid eid in india namaz time

ईद उल अजहा आज, गरीबों का रखा जाता है खास ख्याल

  • त्याग और बलिदान का त्योहार ईद- उल- अजहा 17 जून सोमवार को मनाया जाएगा। इसको लेकर जिले भर के बाजारों में खरीदारों की भीड़ उमड़ने लगी है। परिजनों को नए कपड़े दिलाने के साथ लोग टोपी,इत्र,सेवई आदि की खरीदारी कर रहे हैं।

Yogesh Joshi नई दिल्ली, एजेंसी/लाइव हिन्दुस्तान टीमMon, 17 June 2024 12:22 AM
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त्याग और बलिदान का त्योहार ईद- उल- अजहा 17 जून सोमवार को मनाया जाएगा। इसको लेकर जिले भर के बाजारों में खरीदारों की भीड़ उमड़ने लगी है। परिजनों को नए कपड़े दिलाने के साथ लोग टोपी,इत्र,सेवई आदि की खरीदारी कर रहे हैं। महिलाएं भी पर्व के लिए घरेलू उपयोग की सामग्री की खरीदारी करने के लिए बाजार पहुंच रही है। हालांकि तेज धूप के चलते दिन में लोग घर से कम निकल रहे हैं। लेकिन शाम होते ही बाजार में चल-पहल बढ़ जाती है। भीषण गर्मी होने के बावजूद महिलाएं व बच्चे सुबह और शाम शॉपिंग मॉल व दुकानों पर खरीदारी करने पहुंच रहे हैं। शहर के शिवाजी चौक, शकुंतला मार्केट, गांधी चौक, डोकनियाँ मार्केट, कटोरिया रोड सहित अन्य जगहों पर शनिवार को देर रात तक कपड़ों, श्रृंगार सेवई एवं किराना की दुकानों पर भीड़ लगी रही। बाजार में महिलाएं एवं युवतियां नए डिजाइन के कपड़े श्रृंगार के समान की खरीदारी कर रही थी। वही बच्चे टोपी और खिलौने की खरीदारी कर रहे थे।

ईदगाह में सुबह 7 बजे एवं जामा मस्जिद में 7:30 बजे होगी बकरीद की विशेष नमाज

शहर के शिवाजी चौक के स्थित जामा मस्जिद के इमाम हाजी मौलाना मो. मुनीर उद्दीन ने बताया की बकरीद की विशेष नमाज 17 जून सोमवार को बाबुटोला ईदगाह के मैदान में सुबह 7 बजे नमाज होगी। वही जामा मस्जिद में सुबह 7:30 बजे नमाज अता की जाएगी। बाबुटोला ईदगाह में हाजी मौलाना मो .मुनीर उद्दीन एवं जामा मस्जिद में इमाम काजी नसीम बकरीद की विशेष नमाज अता कराएंगे। नमाज के बाद कुर्बानी का सिलसिला शुरू हो जाएगा।

गरीबों का रखा जाता है खास ख्याल

हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाए जाने वाले त्योहार में ईद की तरह कुर्बानी पर भी गरीबों का खास ख्याल रखा जाता है। इस त्यौहार में सबसे पहले ईदगाह मस्जिदों में नमाज अदा की जाती है। इसके बाद बकरा या भेड़ की कुर्बानी दी जाती है। कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। इसमें एक हिस्सा गरीबों को जबकि दूसरा हिस्सा दोस्तों एवं सगे संबंधियों को दिया जाता है। वहीं तीसरा हिस्सा अपने परिवार के लिए रखा जाता है।

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