Eid Kab Hai : 31 मार्च या 1 अप्रैल, भारत में कब मनेगी ईद? यहां जानें

Yogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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  • Eid In India : ईद-उल-फितर एक खुशी का अवसर है, जिसे सभी उम्र के मुसलमानों द्वारा बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार आमतौर पर इस्लामिक कैलेंडर के दसवें महीने शव्वाल के पहले दिन, नए चाँद को देखने के बाद मनाया जाता है।

Eid Kab Hai : 31 मार्च या 1 अप्रैल, भारत में कब मनेगी ईद? यहां जानें

Eid In India : ईद-उल-फितर एक खुशी का अवसर है, जिसे सभी उम्र के मुसलमानों द्वारा बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार आमतौर पर इस्लामिक कैलेंडर के दसवें महीने शव्वाल के पहले दिन, नए चाँद को देखने के बाद मनाया जाता है। दुनिया भर के मुसलमान ईद-उल-फितर मनाने की तैयारी कर रहे हैं, जो दुनिया भर के मुसलमानों द्वारा मनाए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह रमजान के पवित्र महीने के अंत का प्रतीक है, जिसके दौरान मुसलमान रोजा रखते हैं। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चंद्रमा के देखे जाने के आधार पर ईद की तिथि भिन्न हो सकती है। ईद-उल-फितर उत्सव, क्षमा और मानवता की सेवा करने के लिए अपने विश्वास और प्रतिबद्धता के नवीकरण का समय है। यह हमारे जीवन में एकता, प्रेम और करुणा के महत्व की याद दिलाता है, और इस्लाम के मूल्यों पर प्रतिबिंबित करने का समय है।

सऊदी अरब में आज दिख सकता है ईद का चांद-

भारत और सऊदी अरब के देशों में ईद का त्योहार अलग-अलग दिन मनाया जाता है। सऊदी अरब में ईद भारत से एक दिन पहले मनाई जाती है, क्योंकि सऊदी अरब में चांद भारत से एक दिन पहले दिखाई देता है। अगर सऊदी अरब में चांद 29 मार्च यानी आज दिखाई दिया तो सऊदी अरब में ईद 30 मार्च को मनाई जाएगी।

भारत में कब मनेगी ईद?

अगर 30 मार्च को सऊदी अरब में ईद मनाई जाएगी तो भारत में उसके एक दिन बाद यानी 31 मार्च को ईद मनाई जाएगी। लेकिन अगर सऊदी अरब में चांद 30 मार्च को दिखाई दिया तो भारत में ईद 1 अप्रैल को मनाई जाएगी।

केरल में सऊदी अरब के हिसाब से मनाते हैं ईद

केरल एकमात्र भारतीय राज्य है जिसकी ईद-उल-फितर की तारीख सऊदी अरब में चंद्रमा के दर्शन के आधार पर निर्धारित की जाती है।

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लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।

एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य


योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।


व्यक्तिगत रुचियां


काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


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